समृद्ध मध्यप्रदेश@2047 : : सीएम मोहन के सामने 130 संस्थान रखेंगे विकास का ‘एक संकल्प, 24 अगस्त को होगा राज्य स्तरीय कॉन्क्लेव

भोपाल। समृद्ध मध्यप्रदेश@2047 के लक्ष्य को गति देने के लिए प्रदेश में पहली बार केंद्रीय, राज्य स्तरीय और निजी शिक्षण एवं शोध संस्थानों की विशेषज्ञता को विकास की प्राथमिकताओं से जोड़ने की व्यापक पहल की जा रही है। अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान (एआईजीजीपीए) द्वारा “कंट्रीब्यूशन ऑफ सेंट्रली फंडेड इंस्टीट्यूशंस फॉर समृद्ध मध्यप्रदेश@2047” विषय पर एक दिवसीय राज्य स्तरीय कॉन्क्लेव का आयोजन 24 अगस्त को कुशाभाऊ ठाकरे अंतरराष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर, भोपाल में किया जाएगा। कॉन्क्लेव की थीम “वन इंस्टीट्यूट–वन प्रॉमिस” रखी गई है।
कॉन्क्लेव का शुभारंभ 24 अगस्त को सुबह 11 बजे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव करेंगे। मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल समृद्ध मध्यप्रदेश@2047 पर मुख्य वक्तव्य देंगे। सुशासन संस्थान के उपाध्यक्ष प्रो. राजीव दीक्षित विशेष संबोधन देंगे, जबकि मुख्य वैज्ञानिक सलाहकार प्रो. संतोष कुमार विश्वकर्मा कॉन्क्लेव की पृष्ठभूमि और संदर्भ प्रस्तुत करेंगे। दूसरे सत्र में “समावेशी आर्थिक विकास एवं सामाजिक सशक्तीकरण के लिए समृद्ध मध्यप्रदेश@2047” विषय पर चर्चा होगी। इसमें केंद्रीय संस्थानों के प्रतिनिधि और शासन के अधिकारी विकास की प्राथमिकताओं तथा आगामी कार्ययोजना पर विचार-विमर्श करेंगे।
शोध, तकनीक और विशेषज्ञता से विकास को मिलेगी नई दिशा
कॉन्क्लेव का उद्देश्य प्रदेश की विकास प्राथमिकताओं को अग्रणी केंद्रीय संस्थानों की शोध एवं नवाचार क्षमता, तकनीकी विशेषज्ञता, आधुनिक अधोसंरचना और मानव संसाधन से जोड़ना है। इसके माध्यम से मध्यप्रदेश के सामने मौजूद विकास चुनौतियों के समाधान के लिए संस्थागत स्तर पर दीर्घकालिक सहयोग विकसित किया जाएगा। सरकार की मंशा है कि विशेषज्ञ संस्थानों की क्षमताओं का उपयोग केवल सलाह तक सीमित न रहकर वास्तविक परियोजनाओं और क्रियान्वयन योग्य समाधानों में हो।
130 से अधिक संस्थानों की भागीदारी
कॉन्क्लेव में प्रदेश में स्थित आईआईटी इंदौर, आईआईएम इंदौर, आईआईएसईआर भोपाल, एमएएनआईटी भोपाल, एम्स भोपाल, आईआईआईटी, एनएफएसयू भोपाल, आरआरसीएटी इंदौर, डीआरडीओ, इसरो, राष्ट्रीय एवं केंद्रीय विश्वविद्यालयों सहित विभिन्न क्षेत्रों के प्रमुख संस्थानों की सहभागिता रहेगी। कृषि, स्वास्थ्य, प्रौद्योगिकी, प्रबंधन, रक्षा, ऊर्जा, पर्यावरण और कौशल विकास से जुड़े संस्थान भी इसमें शामिल होंगे।
राज्य में स्थित 59 केंद्रीय संस्थानों, 26 राज्य स्तरीय विश्वविद्यालयों, 11 शासकीय इंजीनियरिंग महाविद्यालयों, 19 शासकीय मेडिकल महाविद्यालयों, 8 राज्य स्तरीय शोध संस्थानों और 9 चयनित निजी विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना है।
हर संस्थान देगा विकास का एक संकल्प
कॉन्क्लेव का सबसे महत्वपूर्ण आकर्षण “वन इंस्टीट्यूट–वन प्रॉमिस” पहल होगी। इसके तहत सहभागी संस्थान मध्यप्रदेश के लिए एक ऐसा सार्थक और क्रियान्वयन योग्य संकल्प देंगे, जिसे प्रदेश की विकास प्राथमिकताओं के अनुरूप आगे बढ़ाया जा सके। इन संकल्पों के माध्यम से नीति निर्माण, शोध, तकनीकी सहयोग और संस्थागत साझेदारी को दीर्घकालीन स्वरूप देने का प्रयास होगा।
विभाग बताएंगे अपनी चुनौतियां, संस्थान देंगे समाधान
कॉन्क्लेव में कृषि, उद्यानिकी, पर्यावरण, उच्च शिक्षा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, तकनीकी शिक्षा एवं कौशल विकास, स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम, नगरीय विकास, ऊर्जा, नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा, औद्योगिक विकास, जनजातीय कल्याण तथा महिला एवं बाल विकास विभाग अपनी प्राथमिकताएं और चुनौतियां साझा करेंगे। इसके आधार पर सहभागी संस्थानों से तकनीकी, शोध और नवाचार आधारित सहयोग की अपेक्षा की जाएगी।
एमओयू से मजबूत होगी सरकार-शिक्षा-शोध साझेदारी
कॉन्क्लेव के दौरान सुशासन संस्थान और केंद्रीय संस्थानों के बीच एमओयू भी किए जाएंगे। इन समझौतों के जरिए सरकार, शिक्षा, अनुसंधान, उद्योग और नवाचार के बीच मजबूत इकोसिस्टम विकसित करने की दिशा में कदम बढ़ाया जाएगा। कॉन्क्लेव से सामने आने वाले सहयोगों को आगे संयुक्त अनुसंधान, विकास परियोजनाओं, तकनीकी समाधान और क्षमता निर्माण कार्यक्रमों के माध्यम से जमीन पर उतारने का लक्ष्य है।
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