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ब्रिक्स संस्कृति सम्मेलन से बढ़ा मप्र का मान : भोपाल बना दुनिया की सांस्कृतिक विरासत का केंद्र, तीन भव्य प्रदर्शनियों में झलक रही भारत की समुद्री विरासत

प्रफुल्ल तिवारी

प्रफुल्ल तिवारी

Aug 06, 2026
06:12 AM
भोपाल बना दुनिया की सांस्कृतिक विरासत का केंद्र, तीन भव्य प्रदर्शनियों में झलक रही भारत की समुद्री विरासत

भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल इन दिनों वैश्विक सांस्कृतिक संवाद का प्रमुख केंद्र बनी हुई है। कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर में 5 से 8 अगस्त तक आयोजित ब्रिक्स संस्कृति सम्मेलन के दौरान भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को दुनिया के सामने प्रस्तुत किया जा रहा है। सम्मेलन में ‘प्रोजेक्ट मौसम’, ‘वृहत्तर भारत’ और ‘ज्ञान भारतम्’ विषय पर आधारित तीन विशेष प्रदर्शनियां प्रतिनिधियों और आगंतुकों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। इन प्रदर्शनियों को 7 और 9 अगस्त को आम नागरिकों के लिए भी खोला जाएगा।

प्रोजेक्ट मौसम में दिखी भारत की समुद्री विरासत

‘प्रोजेक्ट मौसम’ प्रदर्शनी भारत और हिंद महासागर क्षेत्र के देशों के बीच सदियों पुराने समुद्री और सांस्कृतिक संबंधों को जीवंत रूप में प्रस्तुत करती है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण और संस्कृति मंत्रालय की इस पहल में प्राचीन व्यापार मार्गों, धार्मिक संपर्कों और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को आधुनिक तकनीक के माध्यम से प्रदर्शित किया गया है। इमर्सिव फिल्म, डिजिटल इंटरैक्टिव और ओरिगामी गतिविधियां आगंतुकों को भारत की साझा समुद्री विरासत से जोड़ रही हैं। साथ ही यूनेस्को के बहुराष्ट्रीय विश्व धरोहर नामांकन की अवधारणा को भी प्रमुखता से प्रदर्शित किया गया है।

‘वृहत्तर भारत’ में दुनिया से भारत के सांस्कृतिक रिश्तों की झलक

‘वृहत्तर भारत’ प्रदर्शनी भारत और विश्व के बीच हजारों वर्षों से चले आ रहे सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और बौद्धिक संबंधों को दर्शाती है। इसमें सम्राट अशोक, नालंदा विश्वविद्यालय, इंडोनेशिया के प्रंबनन मंदिर, वायांग कुलित, थाईलैंड की वैदिक परंपरा और सिल्क रोड जैसे ऐतिहासिक उदाहरणों के माध्यम से यह बताया गया है कि भारतीय संस्कृति ने सीमाओं से परे विश्व को कैसे प्रभावित किया। संगीत, नृत्य, स्थापत्य और प्राचीन पांडुलिपियों के जरिए ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की भावना को भी प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया है।

‘ज्ञान भारतम’ में भारतीय ज्ञान परंपरा का डिजिटल स्वरूप

‘ज्ञान भारतम’ प्रदर्शनी भारत की प्राचीन पांडुलिपि विरासत और आधुनिक तकनीक के संगम को प्रदर्शित कर रही है। संस्कृति मंत्रालय की इस राष्ट्रीय पहल के तहत अब तक 1.19 करोड़ से अधिक पांडुलिपियों का दस्तावेजीकरण किया जा चुका है। प्रदर्शनी में 16वीं शताब्दी की ‘लीलावती’, ‘रेखागणित’, सिलिकॉन वेफर पर संरक्षित ‘श्रीमद्भगवद्गीता’, ‘पंचतंत्र’ और ‘निरुक्त’ जैसी दुर्लभ पांडुलिपियां आकर्षण का केंद्र हैं। डिजिटल माध्यमों से भारतीय गणित, दर्शन, साहित्य और वैदिक ज्ञान को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।

ब्रिक्स संस्कृति सम्मेलन के माध्यम से भोपाल ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर मध्य प्रदेश की प्रतिष्ठा को नई ऊंचाई दी है। यह आयोजन न केवल भारत की सांस्कृतिक समृद्धि का परिचय दे रहा है, बल्कि मध्य प्रदेश को वैश्विक सांस्कृतिक संवाद के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में भी स्थापित कर रहा है।

प्रफुल्ल तिवारी
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प्रफुल्ल तिवारी

एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।

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