इंदौर में चूहों का आतंक! : बिलों ने कमजोर किया ब्रिज, निगम ने अपनाया अनोखा प्लान

इंदौर। देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर में इन दिनों चूहों का आतंक नगर निगम के लिए बड़ी परेशानी बन गया है। हालात ऐसे हैं कि चूहों के बिलों ने शहर के प्रमुख इलाकों की जमीन तक कमजोर कर दी है। छह महीने पहले रीगल ब्रिज का एक हिस्सा भी चूहों की वजह से धंस गया था। अब गांधी सर्कल में तेजी से बढ़ती चूहों की बस्ती को खत्म करने के लिए नगर निगम ने पूरे क्षेत्र को सीमेंट-कंक्रीट से पक्का करने का फैसला लिया है।
पहले लोहे का जाल, फिर बनेगा कंक्रीट का कवच
नगर निगम अधिकारियों के मुताबिक गांधी सर्कल के खुले हिस्से में चूहों ने इतनी बड़ी संख्या में बिल बना लिए थे कि वहां पौधे तक नहीं पनप पा रहे थे। यहां तक कि लोगों के बैठने के लिए लगाई गई बेंच भी धीरे-धीरे मिट्टी में धंसने लगी थी। समस्या को देखते हुए सबसे पहले पूरे इलाके में मजबूत लोहे के जाल बिछाए गए हैं। इसके बाद पूरे हिस्से को सीमेंट-कंक्रीट से पक्का किया जाएगा, ताकि चूहे दोबारा बिल न बना सकें।
कबूतरों का दाना बन रहा चूहों की दावत
गांधी सर्कल पर बड़ी संख्या में कबूतरों का जमावड़ा रहता है। रोजाना पक्षी प्रेमी यहां बड़ी मात्रा में दाना डालते हैं, लेकिन इसका सबसे ज्यादा फायदा कबूतरों से ज्यादा चूहों को मिल रहा है। बिलों में रहने वाले चूहे पहले ही अनाज पर टूट पड़ते हैं और भरपूर भोजन मिलने से उनकी संख्या और आकार दोनों तेजी से बढ़ रहे हैं। बताया जाता है कि कई बार ये मोटे चूहे कबूतर के बच्चों पर भी हमला कर उन्हें घायल कर चुके हैं। निगम का लक्ष्य अगले एक महीने में पूरे सर्कल को चूहामुक्त करना है।
ब्रिज बचाने के लिए अपनाना पड़ा अनोखा तरीका
चूहों का खतरा सिर्फ गांधी सर्कल तक सीमित नहीं है। करीब 60 साल पुराने शास्त्री ब्रिज तक भी चूहे पहुंच चुके थे और उन्होंने फुटपाथ के नीचे बिल बना लिए थे। इससे पुल की नींव को नुकसान पहुंचने का खतरा बढ़ गया था। नगर निगम ने पहले फुटपाथ के पेवर ब्लॉक हटाकर पेस्ट कंट्रोल कराया। इसके बाद चूहों को दोबारा बिल बनाने से रोकने के लिए वहां कांच के टुकड़े बिछाए गए और फिर पेवर ब्लॉक दोबारा लगाए गए।
शहर की संरचनाओं की सुरक्षा पर बढ़ी चिंता
रीगल ब्रिज का धंसना और अब गांधी सर्कल व शास्त्री ब्रिज पर सामने आई स्थिति ने नगर निगम की चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते चूहों की बढ़ती आबादी पर नियंत्रण नहीं पाया गया तो सड़कें, पुल और सार्वजनिक ढांचे प्रभावित हो सकते हैं। इसी वजह से निगम अब स्थायी समाधान की दिशा में काम कर रहा है, ताकि शहर की संरचनाएं सुरक्षित रहें और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
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