कूनो में इतिहास रचता प्रोजेक्ट चीता : सीएम मोहन ने दो मादा चीतों को खुले जंगल में किया आजाद, भारत की वन्यजीव सफलता को नई रफ्तार

श्योपुर। मध्यप्रदेश एक बार फिर देश के वन्यजीव संरक्षण इतिहास में महत्वपूर्ण अध्याय जोड़ता दिख रहा है। श्योपुर जिले स्थित कूनो नेशनल पार्क में सोमवार को दो मादा चीतों को खुले जंगल में विमुक्त किया गया। मुख्यमंत्री डाॅ. मोहन यादव ने स्वयं कूनो नदी के किनारे बने रिलीज साइट पर इन चीतोंकृसीसीवी-2 और सीसीवी-3कृको प्राकृतिक आवास में छोड़ा।
इस कदम के साथ कूनो में चीतों के पुनर्स्थापन अभियान ने एक और महत्वपूर्ण चरण पूरा कर लिया है, जिससे यह संकेत मिलता है कि ‘प्रोजेक्ट चीता’ अब केवल संरक्षण कार्यक्रम नहीं बल्कि एक सफल पारिस्थितिक प्रयोग के रूप में स्थापित हो रहा है।

‘चीता स्टेट’ बनने की ओर मध्य प्रदेश
मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर कहा कि मध्य प्रदेश ने चीतों को न केवल सुरक्षित वातावरण दिया है, बल्कि उन्हें परिवार की तरह अपनाकर उनके पुनर्वास को वास्तविक सफलता में बदला है। उन्होंने कहा कि राज्य अब देश में ‘चीता स्टेट’ के रूप में अपनी मजबूत पहचान बना रहा है।
उन्होंने यह भी बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा शुरू किए गए इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट ने अब तीन अलग-अलग देशोंकृनामीबिया, दक्षिण अफ्रीका और बोत्सवानाकृसे चीतों को भारत लाकर वैश्विक स्तर पर ध्यान आकर्षित किया है।
लगातार बढ़ती आबादी, बदलता कूनो का परिदृश्य
वर्तमान में कूनो नेशनल पार्क और आसपास के क्षेत्रों में चीतों की संख्या लगातार बढ़ रही है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश में कुल 57 चीते मौजूद हैं, जिनमें से 54 कूनो नेशनल पार्क में और 3 गांधी सागर अभयारण्य में हैं। यह वृद्धि इस बात का संकेत है कि चीतों को भारतीय पर्यावरण में धीरे-धीरे अनुकूल परिस्थितियां मिल रही हैं, जो इस परियोजना की सफलता को मजबूत करती हैं।
70 साल बाद भारत में चीता पुनर्जन्म
‘प्रोजेक्ट चीता’ की शुरुआत 17 सितंबर 2022 को हुई थी, जब नामीबिया से लाए गए आठ चीतों को कूनो में छोड़ा गया था। यह दुनिया का पहला अंतरमहाद्वीपीय बड़े बिल्ली प्रजाति का पुनर्स्थापन प्रोजेक्ट माना जाता है। इसके बाद 2023 में दक्षिण अफ्रीका से 12 और चीतों को भारत लाया गया, और इसी वर्ष फरवरी में बोत्सवाना से नौ चीते कूनो पहुंचे। सबसे ऐतिहासिक क्षण मार्च 2023 में आया, जब मादा चीता ज्वाला ने भारत में लगभग 70 साल बाद पहली बार शावकों को जन्म दिया।
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