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संतों का चिंतन समाज की अमूल्य पूंजी, : स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि जी महाराज के 94वें प्राकट्य दिवस महोत्सव में बोले CM मोहन

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Sep 19, 2026
02:47 PM
स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि जी महाराज के 94वें प्राकट्य दिवस महोत्सव में बोले CM मोहन

भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शनिवार को उज्जैन में भारत माता मंदिर, हरिद्वार के संस्थापक ब्रह्मलीन पूज्यपाद गुरुदेव श्री स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि जी महाराज के 94वें प्राकट्य दिवस महोत्सव में शामिल हुए। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने संतों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करते हुए कहा कि संन्यास मार्ग से जुड़कर समाज के लिए जीवन समर्पित करने वाले संत आध्यात्मिक साधना के साथ समाज की समस्याओं, विकास की दिशा और विभिन्न चुनौतियों पर भी चिंतन करते हैं। उनका मार्गदर्शन समाज को सही दिशा प्रदान करता है। यह सनातन संस्कृति की अद्भुत धरोहर है।

संत समाज के कल्याण की कामना करते हैं

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि संत स्वयं के लिए कुछ नहीं चाहते, बल्कि गृहस्थ से लेकर समाज के प्रत्येक वर्ग के कल्याण की कामना करते हैं। सूर्य देवता की तरह अग्निवर्ण वस्त्र धारण करने वाले संतों की वाणी और उनके विचार पूरे वातावरण को पवित्र कर देते हैं। सनातन धर्म की ध्वजा आज देश और दुनिया में लहरा रही है। उज्जैन जैसी आध्यात्मिक नगरी में संतों का सान्निध्य और उनका मार्गदर्शन समाज के लिए विशेष महत्व रखता है।

उन्होंने ब्रह्मलीन गुरुदेव श्री स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि जी महाराज को स्मरण करते हुए कहा कि वे सनातन धर्म, वैदिक संस्कृति और राष्ट्रभाव के तेजस्वी प्रवक्ता थे। उन्होंने हरिद्वार में विश्वविख्यात भारत माता मंदिर की स्थापना की और निवृत्त जगद्गुरु शंकराचार्य एवं महामंडलेश्वर के रूप में देश-विदेश में भारतीय आध्यात्मिक परंपरा का प्रसार किया। उनका जीवन राष्ट्र, धर्म और समाज सेवा के लिए समर्पित रहा।

सिंहस्थ-2028 के लिए तैयारियों को गति

मुख्यमंत्री ने कहा कि हम सभी सौभाग्यशाली हैं कि बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन में दो वर्ष बाद सिंहस्थ महापर्व आयोजित होने जा रहा है। सिंहस्थ-2028 के लिए प्रदेश सरकार सभी आवश्यक व्यवस्थाओं को पूरा करने में जुटी है। आधारभूत सुविधाओं के साथ आध्यात्मिक चेतना और श्रद्धालुओं की सुविधा पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि प्रत्येक बारह वर्ष में होने वाला सिंहस्थ केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक परंपरा और संत समाज के मार्गदर्शन का विराट पर्व है। सरकार लगातार विकास कार्यों को गति दे रही है, ताकि देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें।

महाकाल महालोक के बाद बढ़ा धार्मिक पर्यटन

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2022 में श्री महाकाल महालोक के निर्माण के बाद उज्जैन धार्मिक पर्यटन के प्रमुख केंद्र के रूप में तेजी से विकसित हुआ है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु बाबा महाकाल के दर्शन के लिए उज्जैन पहुंच रहे हैं। गत वर्ष आठ करोड़ से अधिक तीर्थयात्रियों ने उज्जैन में दर्शन किए, जबकि इस वर्ष यह संख्या 12 करोड़ से अधिक पहुंचने की संभावना है।

उन्होंने उज्जैन की ऐतिहासिक और वैज्ञानिक परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि यह नगरी केवल धर्म की राजधानी ही नहीं, बल्कि काल गणना, विज्ञान, आध्यात्मिकता और दर्शन की भी धरती है। वैदिक काल गणना की परंपरा को आधुनिक दृष्टि से आगे बढ़ाते हुए वेधशाला का विकास किया गया है। लगभग तीन सौ वर्ष पूर्व तक विश्व में समय निर्धारण से जुड़ी गणनाओं में उज्जैन का विशेष महत्व था। उत्तरायण, दक्षिणायन और सूर्य मध्याह्न जैसी गणनाओं के मूल सिद्धांत आज भी यहां की परंपरा में जीवंत हैं।

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एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।

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