आदिरंग महोत्सव का भव्य समापन: : सीएम यादव बोले- जनजातीय कला को मिलेगा वैश्विक मंच, सिकल सेल नियंत्रण में भी मप्र अग्रणी

भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि राज्य सरकार जनजातीय संस्कृति के संरक्षण के साथ-साथ जनजातीय समाज के समग्र विकास के लिए निरंतर कार्य कर रही है। पांच दिवसीय आदिरंग शिल्पकार महोत्सव के समापन समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि सिकल सेल एनीमिया जैसी गंभीर आनुवंशिक बीमारी की स्क्रीनिंग, नियंत्रण और उपचार के क्षेत्र में मध्यप्रदेश देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है। साथ ही जनजातीय कला, संस्कृति और परंपराओं को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने के लिए भी सरकार लगातार प्रयास कर रही है। इस अवसर पर उन्होंने जनजातीय कलाकारों द्वारा तैयार की गई आकर्षक शिल्प कृतियों की प्रदर्शनी का अवलोकन किया और कलाकारों से संवाद कर उनके नवाचारों की सराहना की।
सिकल सेल नियंत्रण और जनजातीय विकास पर विशेष फोकस
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वर्ष 2022 से प्रदेश में सिकल सेल एनीमिया नियंत्रण अभियान चलाया जा रहा है, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। उन्होंने कहा कि यह बीमारी कई पीढिय़ों को प्रभावित करती है, इसलिए समय पर स्क्रीनिंग और उपचार बेहद आवश्यक है। राज्य सरकार इस दिशा में प्रभावी कदम उठा रही है और प्रदेश इस अभियान में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो चुका है। उन्होंने बताया कि जनजातीय नायकों के सम्मान में प्रदेश में तीन विश्वविद्यालय स्थापित किए गए हैं। सतपुड़ा क्षेत्र में राजा भभूत सिंह, राजा शंकर शाह, रघुनाथ शाह और रानी दुर्गावती की स्मृति में विभिन्न आयोजन कर उनके योगदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाया जा रहा है।
जनजातीय शिल्प को मिल रही नई पहचान
मुख्यमंत्री ने कहा कि आदिरंग महोत्सव ने जनजातीय कलाकारों की प्रतिभा को नया मंच दिया है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश की जनजातीय कला और शिल्प का डंका अब देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी बज रहा है। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिज़ाइन (एनआईडी) द्वारा पारंपरिक कला को आधुनिक डिजाइन और बाजार की जरूरतों के अनुरूप प्रस्तुत करने का प्रयास सराहनीय है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विरासत से विकास अभियान का उल्लेख करते हुए कहा कि देशभर में लोक संस्कृति और पारंपरिक कला को बढ़ावा देकर विकास के नए अवसर तैयार किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने हाल ही में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के मध्यप्रदेश प्रवास को भी प्रदेश के लिए गौरव का विषय बताया।
राष्ट्रीय स्तर पर बन रही जनजातीय कला की पहचान
जनजातीय कार्य मंत्री कुंवर विजय शाह ने कहा कि नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिज़ाइन के सहयोग से आयोजित आदिरंग महोत्सव ने मध्यप्रदेश की पारंपरिक जनजातीय कला को राष्ट्रीय पहचान दिलाने का कार्य किया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार जनजातीय कलाकारों को प्रोत्साहित कर उनकी सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए निरंतर कार्य कर रही है।
140 से अधिक शिल्पकारों ने दिखाई अपनी प्रतिभा
पांच दिवसीय आदिरंग महोत्सव में मध्यप्रदेश के विभिन्न अंचलों से आए 140 से अधिक जनजातीय शिल्पकारों ने भाग लिया। भील, गोंड, बैगा सहित विभिन्न जनजातीय समुदायों के कलाकारों ने अपनी पारंपरिक चित्रकला, हस्तशिल्प और हस्तनिर्मित उत्पादों का प्रदर्शन किया। डिजाइन कार्यशालाओं के दौरान तैयार किए गए नवीन उत्पादों और डिजाइन अवधारणाओं की विशेष प्रदर्शनी भी आकर्षण का केंद्र रही।
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