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सरकार के दबाव में बदला फैसला? : मंत्री प्रतिमा बागरी को क्लीन चिट पर कांग्रेस ने उठाए सवाल , रिपोर्ट की अनदेखी का आरोप, हाईकोर्ट जाने की घोषणा

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Jul 17, 2026
10:56 AM
मंत्री प्रतिमा बागरी को क्लीन चिट पर कांग्रेस ने उठाए सवाल , रिपोर्ट की अनदेखी का आरोप, हाईकोर्ट जाने की घोषणा

भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार की राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी के अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र को राज्य स्तरीय जाति छानबीन समिति द्वारा वैध घोषित किए जाने के बाद यह मामला एक बार फिर राजनीतिक और कानूनी बहस का विषय बन गया है। शिकायतकर्ता एवं मध्य प्रदेश कांग्रेस अनुसूचित जाति विभाग के अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार ने समिति के फैसले पर गंभीर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि जांच निष्पक्ष नहीं हुई और सरकार के दबाव में महत्वपूर्ण दस्तावेजों एवं ऐतिहासिक तथ्यों की अनदेखी कर मंत्री को क्लीन चिट दी गई। उन्होंने कहा कि उनकी शिकायत पूरी तरह दस्तावेजी साक्ष्यों पर आधारित थी, लेकिन समिति ने उन पर पर्याप्त विचार नहीं किया।

प्रदीप अहिरवार ने प्रेस वार्ता में दावा किया कि जांच के दौरान प्रतिमा बागरी अन्य मंत्रियों के साथ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मिली थीं, जिसके बाद जांच की दिशा प्रभावित हुई। उनका आरोप है कि समिति ने संविधान (अनुसूचित जातियां) आदेश, 1950, वर्ष 1961 और 1971 की जनगणना के रिकॉर्ड, ट्राइबल रिसर्च इंस्टीट्यूट की 1998-99 की मानवशास्त्रीय रिपोर्ट तथा वर्ष 2007 के राजपत्र जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेजों को अपने निर्णय में उचित महत्व नहीं दिया। उनका कहना है कि इन दस्तावेजों के आधार पर मामले की निष्पक्ष समीक्षा की जानी चाहिए थी।

अहिरवार का दाावा

अहिरवार का दावा है कि 1950 के अनुसूचित जाति आदेश के अनुसार जिस क्षेत्र में प्रतिमा बागरी का परिवार निवास करता था, वहां बागरी समुदाय अनुसूचित जाति की सूची में शामिल नहीं था। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि 1961 और 1971 की जनगणना में परिवार ने स्वयं को अनुसूचित जाति के रूप में दर्ज नहीं कराया था, जबकि टीआरआई की रिपोर्ट में विंध्य और बुंदेलखंड क्षेत्र के बागरी समुदाय को राजपूत-ठाकुर की उपजाति बताया गया है। उनके अनुसार 1976 में पूरे प्रदेश के लिए संयुक्त अनुसूचित जाति सूची लागू होने के बाद ऐसे क्षेत्रों के लोगों ने भी अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र बनवाने शुरू कर दिए, जहां पहले यह दर्जा लागू नहीं था।

हाईकोर्ट में चुनौती देने का ऐलान

कांग्रेस नेता ने कहा कि वह राज्य स्तरीय जाति छानबीन समिति के फैसले को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में चुनौती देंगे और आवश्यकता पड़ने पर सुप्रीम कोर्ट तक जाएंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि समिति ने जांच एजेंसी की बजाय देखभाल समिति की तरह काम किया और मंत्री को बचाने के लिए संवैधानिक प्रावधानों तथा शासकीय दस्तावेजों की अनदेखी की। वहीं, राज्य स्तरीय जाति छानबीन समिति पहले ही प्रतिमा बागरी के जाति प्रमाण पत्र को वैध ठहरा चुकी है। अब इस पूरे मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया और न्यायालय का रुख महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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