रामेश्वरम से इंदौर तक गूंजेगा 'बम-बम भोले'... : सावन में शिव की भक्ति चरम पर, 2100 किलोमीटर की अद्भुत डाक कांवड़ यात्रा बनेगी आस्था का महाअभियान

इंदौर। सावन के पावन माह में भगवान शिव की भक्ति अपने चरम पर है। इसी कड़ी में इंदौर के विजय नगर स्थित बावड़ी वाले बालाजी मंदिर की ओर से इस वर्ष एक ऐसी डाक कांवड़ यात्रा निकाली जा रही है, जो आस्था, अनुशासन और समर्पण का अद्भुत उदाहरण बनेगी। यह यात्रा तमिलनाडु के पवित्र तीर्थ रामेश्वरम से शुरू होकर लगभग 2100 किलोमीटर की दूरी तय करते हुए इंदौर पहुंचेगी। इसे इस वर्ष की सबसे लंबी डाक कांवड़ यात्रा माना जा रहा है।
सात दिन में तय होगी 2100 किलोमीटर की दूरी
यात्रा में करीब 300 कांवड़ यात्री शामिल होंगे। श्रद्धालु 10 अगस्त को रामेश्वरम पहुंचेंगे और 15 अगस्त से डाक कांवड़ यात्रा का शुभारंभ होगा। लगातार दौड़ते हुए यह यात्रा लगभग 171 घंटे यानी सात दिन में पूरी की जाएगी और 21 अगस्त तक इंदौर पहुंचने की संभावना है। कांवड़ यात्रियों की औसत गति 11 से 13 किलोमीटर प्रति घंटा रहेगी, जिससे यह यात्रा अपनी गति और अनुशासन के लिए भी विशेष मानी जा रही है।
2015 से निभाई जा रही अनोखी परंपरा
इस डाक कांवड़ यात्रा की शुरुआत वर्ष 2015 में हुई थी। मंदिर के महंत रामजी महाराज के मार्गदर्शन में यह परंपरा लगातार आगे बढ़ रही है। उनका कहना है कि यात्रा में बड़ी संख्या में युवा श्रद्धालु शामिल होते हैं, जो कंधों पर कांवड़ लेकर दौड़ते हुए भगवान शिव के लिए पवित्र जल लेकर आते हैं। पूरी यात्रा के दौरान भोजन, चिकित्सा, विश्राम और सुरक्षा जैसी सभी आवश्यक व्यवस्थाएं समिति की ओर से की जाती हैं।
हर वर्ष बढ़ता जा रहा आस्था का विस्तार
बावड़ी वाले बालाजी मंदिर समिति अब तक पांच सफल डाक कांवड़ यात्राएं निकाल चुकी है। पहले ओंकारेश्वर, अमरकंटक, गंगोत्री धाम, द्वारका और अयोध्या से इंदौर तक डाक कांवड़ लाई जा चुकी है। इस वर्ष रामेश्वरम से इंदौर तक की 2100 किलोमीटर लंबी यात्रा अब तक की सबसे बड़ी और सबसे कठिन यात्रा मानी जा रही है।
कांवड़ यात्रा के चार स्वरूप
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कांवड़ यात्रा चार प्रकार की होती है— सामान्य कांवड़, जिसमें श्रद्धालु जल लेकर पैदल चलते हैं; खड़ी कांवड़, जिसमें कांवड़ को जमीन पर नहीं रखा जाता; दंडवत कांवड़, जिसमें श्रद्धालु दंडवत करते हुए यात्रा पूरी करते हैं; और डाक कांवड़, जिसमें श्रद्धालु दौड़ते हुए निर्धारित समय में जल लेकर भगवान शिव के दरबार तक पहुंचते हैं।
श्रद्धा, सेवा और संकल्प का अद्भुत उदाहरण
यात्रा से जुड़े श्रद्धालु सुनील भिड़े और अनिल यादव का कहना है कि इस अभियान में शामिल प्रत्येक शिवभक्त के लिए भोजन, विश्राम और स्वास्थ्य की समुचित व्यवस्था की जाती है। उनका मानना है कि डाक कांवड़ केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि शिवभक्ति, अनुशासन, सेवा और सामूहिक समर्पण का जीवंत उत्सव है, जो हर वर्ष हजारों श्रद्धालुओं को आस्था से जोड़ने का कार्य करता है।
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