शिक्षकों के आंदोलन में दिग्गी की एंट्री : बोले- शिक्षकों के साथ अन्याय बर्दाश्त नहीं, सीएम हाउस के सामने धरना देने दी चेतावनी

भोपाल। राजधानी भोपाल के नीलम पार्क में पद वृद्धि की मांग को लेकर चयनित शिक्षकों के आंदोलन पर सियासत तेज हो गई है। शिक्षक दिवस के मौके पर मप्र के पूर्व सीएम और कांग्रेस के दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह प्रदर्शनकारियों के बीच पहुंच। जहां उन्होंने शिक्षकों की समस्याओं को लेकर सरकार पर तीखा हमला बोला। हालांकि इससे पहले उन्हें
दिग्विजय सिंह ने कहा कि देश में शिक्षकों की हालत खराब है और मध्यप्रदेश में भी शिक्षकों के साथ अन्याय किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षकों पर टीईटी परीक्षा देने का फैसला थोप दिया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से उन्होंने टीईटी की अनिवार्यता का फैसला वापस लेने की मांग की। उन्होंने कहा कि अतिथि शिक्षकों की नियुक्तियां भी सरकार नहीं कर रही है, जबकि शिक्षा विभाग में बड़ी संख्या में पद खाली पड़े हैं। उनके मुताबिक वर्ग दो और तीन के करीब 43 हजार रिक्त पदों पर तत्काल भर्ती की जा सकती है।
‘99 फीसदी अंक वालों की भी भर्ती नहीं’
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि चयनित शिक्षक वर्षों की मेहनत के बाद परीक्षा और चयन प्रक्रिया से गुजरकर आए हैं। इसके बावजूद 99 फीसदी तक अंक हासिल करने वाले चयनित शिक्षकों की भी नियुक्ति नहीं की जा रही है। उन्होंने कहा कि ये बच्चे व्यापम के जरिए नहीं आए, बल्कि मेहनत और योग्यता के आधार पर चयनित हुए हैं। दिग्विजय सिंह ने दावा किया कि शिक्षा विभाग में करीब एक लाख 41 हजार पद खाली हैं। उन्होंने सरकार से मांग की कि आधे पद सीधी भर्ती और आधे पद पदोन्नति के जरिए भरे जाएं। साथ ही पदों की संख्या बढ़ाकर भी भर्ती की जा सकती है।
‘सीएम हाउस के सामने शिक्षकों के साथ धरना देने दी चेतावनी
दिग्विजय सिंह ने कहा कि उन्होंने मुख्यमंत्री से मिलने का समय मांगा है। उन्होंने आंदोलनकारी शिक्षकों को भरोसा दिलाते हुए कहा कि उनकी आवाज लोकसभा और राज्यसभा में भी उठाई जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार और संगठन के जिम्मेदार लोगों पर दबाव बनाया जाएगा।
उन्होंने कहा कि यदि जरूरत पड़ी तो वे खुद मुख्यमंत्री आवास के सामने शिक्षकों के साथ धरने पर बैठेंगे और आंदोलन खत्म करने की अपील करते हुए आमरण अनशन समाप्त करने को कहा।
आरएसएस पर भी लगाए आरोप
दिग्विजय सिंह ने आरोप लगाया कि भाजपा शासित राज्यों में शिक्षकों के साथ अन्याय हो रहा है। उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर भी सवाल उठाते हुए पूछा कि क्या केवल संघ से जुड़े लोगों को ही नौकरी दी जाएगी। उन्होंने चयनित शिक्षकों से मिलने के लिए सरकार के किसी प्रतिनिधि के नहीं पहुंचने पर भी नाराजगी जताई और कहा कि ऐसी सरकार को बर्खास्त कर देना चाहिए।
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