शेयर बाजार को मिला 'देसी दम' : घरेलू निवेशकों ने संभाली बाजार की कमान, सेबी की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा- विदेशी बिकवाली का असर हुआ बेअसर

नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार में वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने मजबूत भरोसा दिखाते हुए 8.5 लाख करोड़ रुपये का निवेश किया। भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, इस भारी निवेश ने विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) की 1.8 लाख करोड़ रुपये की बिकवाली के असर को काफी हद तक संतुलित कर दिया। रिपोर्ट में कहा गया है कि घरेलू निवेशकों की बढ़ती भागीदारी भारतीय पूंजी बाजार को अधिक स्थिर और मजबूत बना रही है।
घरेलू निवेशकों की बढ़ी हिस्सेदारी
सेबी के मुताबिक, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) में सूचीबद्ध कंपनियों में डीआईआई की हिस्सेदारी बढ़कर 17 प्रतिशत हो गई है। वहीं, विदेशी निवेशकों की हिस्सेदारी घटकर 15 महीने के निचले स्तर 15.8 प्रतिशत पर पहुंच गई। इससे साफ है कि अब भारतीय निवेशक बाजार की दिशा तय करने में पहले से अधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
म्यूचुअल फंड और एसआईपी बने सबसे बड़े सहारे
रिपोर्ट के अनुसार, घरेलू निवेश में सबसे बड़ा योगदान म्यूचुअल फंड का रहा, जिसने करीब 6.4 लाख करोड़ रुपये का निवेश किया। लगातार बढ़ रहे सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (एसआईपी) और खुदरा निवेशकों की सक्रिय भागीदारी ने इस बढ़त को मजबूती दी। इसी दौरान देश में डीमैट खातों की संख्या बढ़कर 22.5 करोड़ पहुंच गई, जो डिजिटल माध्यम से निवेश की बढ़ती पहुंच को दर्शाती है।
पूंजी जुटाने में भी बना नया रिकॉर्ड
कॉरपोरेट कंपनियों ने वित्त वर्ष 2025-26 में आईपीओ, एफपीओ और राइट्स इश्यू के जरिए रिकॉर्ड 2.35 लाख करोड़ रुपये जुटाए, जो पिछले वर्ष की तुलना में 11.7 प्रतिशत अधिक है। वहीं, 257 कंपनियों ने एसएमई प्लेटफॉर्म के जरिए 11,587 करोड़ रुपये जुटाए। राइट्स इश्यू से जुटाई गई पूंजी 134.2 प्रतिशत बढ़कर 46,168 करोड़ रुपये तक पहुंच गई।
सेबी ने बताई बाजार की सबसे बड़ी ताकत
सेबी के अनुसार, प्रेफरेंशियल अलॉटमेंट और शेयर बायबैक में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई। नियामक का कहना है कि घरेलू बचत, खुदरा निवेशकों की बढ़ती भागीदारी और पूंजी जुटाने के विविध माध्यमों ने भारतीय पूंजी बाजार को पहले से अधिक परिपक्व और स्थिर बनाया है। यही वजह है कि विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली के बावजूद बाजार पर उसका बड़ा नकारात्मक असर देखने को नहीं मिला।
प्रफुल्ल तिवारी
एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।
