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20 को मेडिकल दुकानें रहेंगी बंद : दवाओं की ऑनलाइन बिक्री के विरोध में देशव्यापी आंदोलन करेंगे दवा विक्रेता

नीरज द्विवेदी

नीरज द्विवेदी

May 17, 2026
11:55 AM
दवाओं की ऑनलाइन बिक्री के विरोध में देशव्यापी आंदोलन करेंगे दवा विक्रेता

ऑनलाइन फार्मेसी (ई-फार्मेसी) के विरोध में मध्य प्रदेश सहित पूरे देश में दवा विक्रेताओं ने 20 मई को एक दिवसीय हड़ताल का आह्वान किया है। इस दौरान मेडिकल स्टोर बंद रहने से दवाओं की किल्लत हो सकती है। ऐसे में मरीजों को सलाह दी गई है कि वे अपनी जरूरी दवाएं पहले से खरीदकर सुरक्षित रख लें।

हड़ताल की बड़ी वजह

All India Organisation of Chemists and Druggists ने ऑनलाइन दवा बिक्री, ई-फार्मेसी और भारी डिस्काउंट के विरोध में यह बंद बुलाया है। प्रदेश के सभी थोक और रिटेल मेडिकल स्टोर बंद रहेंगे, जिससे सामान्य दवा आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।

शुगर, बीपी, थायराइड और अन्य नियमित बीमारियों से पीड़ित मरीजों को आवश्यक दवाएं पहले से व्यवस्थित कर लेने की सलाह दी गई है। यह हड़ताल 19 मई रात 12 बजे से 20 मई रात 12 बजे तक प्रभावी रहने की संभावना है।

संगठन के नेतृत्व में देशभर के 12.40 लाख से अधिक केमिस्ट ‘भारत बंद’ की तैयारी में हैं। ऐसे में देश के अधिकांश शहरों, कस्बों और गांवों में दवा दुकानों के बंद रहने की आशंका जताई जा रही है।

हड़ताल पर क्यों उतरे केमिस्ट?

दवा विक्रेताओं के इस बड़े विरोध प्रदर्शन की मुख्य वजह इंटरनेट के जरिए बिकने वाली दवाएं यानी ‘ई-फार्मेसी’ और बड़ी कॉरपोरेट कंपनियों द्वारा दिए जा रहे भारी डिस्काउंट हैं।

केमिस्टों का कहना है कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर दवाओं की बिक्री बिना सख्त नियमों और पर्याप्त निगरानी के हो रही है। इससे न केवल उनका कारोबार प्रभावित हो रहा है, बल्कि मरीजों की सुरक्षा पर भी खतरा बढ़ रहा है।

भारी छूट से छोटे दुकानदारों पर संकट

बड़ी कॉरपोरेट कंपनियां ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर दवाइयों पर भारी छूट दे रही हैं। इससे मोहल्लों, गांव-कस्बों और छोटे शहरों के सामान्य मेडिकल स्टोर प्रतिस्पर्धा में पिछड़ते जा रहे हैं।

लगातार घटते मुनाफे के कारण छोटे दुकानदारों का कारोबार प्रभावित हो रहा है और कई मेडिकल स्टोर बंद होने की कगार पर पहुंच गए हैं।

कोरोना काल के नियमों के दुरुपयोग का आरोप

कोरोना महामारी के दौरान, जब लोगों के लिए घर से निकलना मुश्किल था, तब सरकार ने दवा बिक्री से जुड़े कुछ नियमों में अस्थायी राहत दी थी।

केमिस्ट संगठनों का आरोप है कि महामारी खत्म होने के बाद भी उन्हीं ढीले नियमों का फायदा ई-फार्मेसी कंपनियां उठा रही हैं और ऑनलाइन दवा कारोबार तेजी से बढ़ रहा है।

केमिस्टों की तीन बड़ी चिंताएं

भोपाल केमिस्ट संघ के अध्यक्ष Jitendra Chakad के मुताबिक, केमिस्टों की सबसे बड़ी चिंता यह है कि कई ऑनलाइन वेबसाइट्स और ऐप्स पर बिना डॉक्टर की वैध पर्ची के दवाएं बेची जा रही हैं। उनका आरोप है कि लोग एक ही प्रिस्क्रिप्शन को बार-बार अपलोड कर दवाएं मंगा रहे हैं। कई मामलों में फर्जी पर्चियों के जरिए नशीली दवाएं और हैवी एंटीबायोटिक्स भी आसानी से घर पहुंचाई जा रही हैं। केमिस्ट संगठनों का कहना है कि इससे आम लोगों की सेहत पर गंभीर खतरा पैदा हो सकता है।

नीरज द्विवेदी
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नीरज द्विवेदी

5 साल से ज्यादा का पत्रकारिता अनुभव। टीवी और प्रिंट मीडिया में कलमकारी की है। पॉलिटिकल और पब्लिक कनेक्ट की खबरों में दिलचल्पी। TV27NEWS DIGITAL में एंकरिंग भी कर रहे हैं।

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