परिसीमन विवाद ने बिगाड़ा खेल : अंतरात्मा की अपील भी नहीं आई काम, विपक्ष की एकजुटता से अटक गया महिला आरक्षण बिल

नई दिल्ली। संसद में शुक्रवार को केन्द्र सरकार को एक अहम विधायी झटका लगा, जब महिला आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक को आवश्यक दो-तिहाई बहुमत नहीं मिल पाया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘अंतरात्मा की आवाज पर वोट’ देने की अपील और गृह मंत्री अमित शाह के तर्कों के बावजूद विपक्षी दल एकजुट रहे और प्रस्ताव गिर गया।
वोटिंग में विधेयक के पक्ष में 298 और विरोध में 230 वोट पड़े, जबकि इसे पारित करने के लिए करीब 352 वोटों की जरूरत थी। यह पिछले 12 वर्षों में पहली बार है जब केंद्र सरकार का कोई बड़ा विधेयक संसद में पास नहीं हो सका। विवाद की जड़ महिला आरक्षण के साथ परिसीमन के प्रावधान को जोड़ना रहा। विपक्ष का आरोप है कि इस प्रस्ताव के तहत लोकसभा सीटों में 50ः बढ़ोतरी से दक्षिण भारतीय राज्यों का प्रतिनिधित्व घट सकता है और इससे राजनीतिक संतुलन बिगड़ेगा।
हार गया मोदी सरकार का अहंकारः केजरीवाल
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने इसे “खतरनाक और शरारतपूर्ण प्रयास” बताया, जबकि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि उनकी पार्टी महिला आरक्षण के पक्ष में है, लेकिन परिसीमन के नाम पर “साजिश” स्वीकार नहीं करेगी। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि “तमिलनाडु ने दिल्ली के अहंकार को हरा दिया।” वहीं आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल ने इसे “मोदी सरकार के अहंकार की हार” बताया।
संसदीय कार्यमंत्री ने सरकार पर लगाया आरोप
सरकार की ओर से संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने विपक्ष पर महिलाओं के साथ ऐतिहासिक अन्याय करने का आरोप लगाया और कहा कि सरकार तब तक प्रयास जारी रखेगी जब तक महिलाओं को विधायिकाओं में आरक्षण नहीं मिल जाता। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने विपक्ष पर राजनीति को प्राथमिकता देने का आरोप लगाया। वहीं भाजपा ने विपक्ष को “महिला-विरोधी” करार देते हुए संसद परिसर में विरोध प्रदर्शन भी किया।
वोटिंग से पहले पीएम ने की थी भावुक अपील
वोटिंग से पहले प्रधानमंत्री मोदी ने भावुक अपील करते हुए सांसदों से अपने परिवार की महिलाओं को याद कर निर्णय लेने को कहा था। हालांकि, परिसीमन को लेकर उठे सवालों और क्षेत्रीय संतुलन की चिंता ने विपक्ष को एकजुट बनाए रखा। यह घटनाक्रम आने वाले समय में केंद्र और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव को और तेज कर सकता है, खासकर तब जब 2029 के चुनावों और जनगणना जैसे मुद्दे भी इससे जुड़े हुए हैं।
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