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राघव चड्ढा को बड़ा झटका : हाईकोर्ट का पर्सनैलिटी राइट्स केस में राहत से इनकार, राजनीतिक आलोचना लोकतंत्र का हिस्सा

admin

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May 21, 2026
11:11 AM
हाईकोर्ट का पर्सनैलिटी राइट्स केस में राहत से इनकार, राजनीतिक आलोचना लोकतंत्र का हिस्सा

नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट से भाजपा सांसद राघव चड्ढा को बड़ा झटका लगा है। राघव द्वारा व्यक्तिगत अधिकारों की सुरक्षा के लिए लगाई गई याचिका पर हाईकोर्ट ने सुनवाई से इनकार कर दिया है। साथ ही सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि राजनीतिक नेताओं पर टिप्पणी, व्यंग्य और आलोचना लोकतंत्र का अहम हिस्सा है और इन्हें केवल इसलिए नहीं रोका जा सकता क्योंकि वे किसी को असहज लगते हैं।

अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में मानहानि का मुकदमा दर्ज किया जा सकता है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि पार्टी बदलना एक सार्वजनिक फैसला है। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति सुब्रमणियम प्रसाद की बेंच कर रही थी। अदालत ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) से बने वीडियो पर भी टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि यदि इन वीडियो पर आपत्ति है, तो विशेष याचिका दाखिल करें। व्यापक रोक लगाने की मांग नहीं की जा सकती।

राघव ने याचिका में लगाए थे यह आरोप

बता दें कि राघव चड्ढा ने हाई कोर्ट में याचिका दाखिल कर आरोप लगाया था कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर उनकी तस्वीर, नाम और पहचान का गलत तरीके से इस्तेमाल किया जा रहा है। याचिका में कहा गया कि राजनीतिक दल बदलने के बाद उनके खिलाफ सुनियोजित ऑनलाइन अभियान चलाया गया, जिससे उनकी छवि को नुकसान पहुंचा।

कोर्ट बोला- यह पर्सनैलिटी राइट्स का मामला नहीं

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने मौखिक टिप्पणी में कहा कि सार्वजनिक जीवन में रहने वाले नेताओं को आलोचना का सामना करना पड़ता है। अदालत ने कहा कि यह पर्सनैलिटी राइट्स का मामला नहीं बनता। अगर किसी को लगता है कि उसकी छवि खराब हुई है तो वह मानहानि का मुकदमा दायर कर सकता है।

आरके लक्ष्मण का उदाहरण देकर समझाया पक्ष

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने मशहूर कार्टूनिस्ट आरके लक्ष्मण का भी जिक्र किया। अदालत ने कहा कि आजादी के बाद से राजनीतिक कार्टून और व्यंग्य लोकतांत्रिक बहस का हिस्सा रहे हैं। पहले आलोचना अखबारों और कार्टून तक सीमित थी, अब डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के जरिए ज्यादा दिखाई देती है।

राघव पक्ष ने क्या दलील दी

राघव चड्ढा की ओर से वरिष्ठ वकील राजीव नायरने दलील दी कि सोशल मीडिया पोस्ट्स में उन्हें पैसे लेकर पार्टी बदलने वाला दिखाया गया, जो निष्पक्ष आलोचना की सीमा से बाहर है। फिलहाल हाई कोर्ट ने मामले में न्याय-मित्र नियुक्त करने की बात कही है और अंतरिम आदेश सुरक्षित रख लिया है। साथ ही राघव चड्ढा को मानहानि का दावा जोड़ने की अनुमति भी दे दी गई।

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