बलूचिस्तान की दौलत लूटकर जनता को रखा गरीब : यूएन के मंच से भारत ने पाकिस्तान की फिर उधेड़ी बखिया

संयुक्त राष्ट्र। संयुक्त राष्ट्र में भारत ने एक बार फिर पाकिस्तान को कूटनीतिक मंच पर घेरते हुए बलूचिस्तान के प्राकृतिक संसाधनों के कथित शोषण का मुद्दा जोरदार ढंग से उठाया। भारत ने कहा कि तेल, गैस, खनिज और अन्य बहुमूल्य प्राकृतिक संपदाओं से समृद्ध बलूचिस्तान का वर्षों से दोहन किया जा रहा है, जबकि वहां के लोगों को उनके संसाधनों का उचित लाभ नहीं मिल रहा। भारत का कहना है कि इसी असमानता ने क्षेत्र में असंतोष, हिंसा और अस्थिरता को बढ़ावा दिया है।
संसाधनों पर जनता का पहला अधिकार
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने श्नेचुरल रिसोर्स गवर्नेंसरू पीस, सिक्योरिटी एंड प्रॉस्पेरिटीश् विषय पर आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में कहा कि किसी भी देश की जिम्मेदारी है कि प्राकृतिक संसाधनों से मिलने वाले लाभ में स्थानीय लोगों की न्यायसंगत हिस्सेदारी सुनिश्चित की जाए। उन्होंने बिना पाकिस्तान का नाम लिए कहा कि ऐसा नहीं होने के गंभीर परिणाम सामने आते हैं, जिनका असर केवल उस देश तक सीमित नहीं रहता बल्कि पूरे क्षेत्र की सुरक्षा और स्थिरता प्रभावित होती है।
बलूचिस्तान का उदाहरण देकर साधा निशाना
भारत ने संकेत दिया कि प्राकृतिक संपदा से भरपूर होने के बावजूद बलूचिस्तान आज भी पाकिस्तान के सबसे पिछड़े और गरीब क्षेत्रों में शामिल है। स्थानीय लोगों द्वारा अपने अधिकारों और संसाधनों में हिस्सेदारी की मांग लंबे समय से की जाती रही है, लेकिन विरोध प्रदर्शनों को बलपूर्वक दबाया गया, जिससे हालात और बिगड़े। भारत ने कहा कि केवल सुरक्षा बलों के सहारे ऐसे क्षेत्रों का प्रबंधन करने की नीति समस्या का समाधान नहीं, बल्कि उसे और गंभीर बनाती है।
आतंक और अवैध कारोबार पर भी जताई चिंता
पी. हरीश ने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों का अवैध दोहन और तस्करी कई बार हथियारबंद समूहों और आतंकवादी संगठनों की आर्थिक मदद का जरिया बन जाती है। इससे संघर्ष लंबे समय तक चलता है और आम नागरिकों को भारी कीमत चुकानी पड़ती है। उन्होंने कहा कि संसाधनों का पारदर्शी और जवाबदेह प्रबंधन ही शांति, विकास और स्थिरता की सबसे मजबूत नींव है।
ग्लोबल साउथ और अफ्रीका का भी उठाया मुद्दा
भारत ने कहा कि ग्लोबल साउथ और विशेष रूप से अफ्रीकी देशों ने लंबे समय तक औपनिवेशिक शोषण का सामना किया है। आज भी कई देशों से प्राकृतिक संसाधन निकाले जाते हैं, लेकिन उनका आर्थिक लाभ स्थानीय लोगों तक नहीं पहुंचता। इसके बजाय वहां के समुदायों को पर्यावरणीय नुकसान, गरीबी और सामाजिक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। भारत ने जोर देकर कहा कि अब समय आ गया है कि देशों को अपने संसाधनों पर वास्तविक नियंत्रण और उनका लाभ अपने नागरिकों तक पहुंचाने का अवसर मिले।
संयुक्त राष्ट्र महासचिव का भी जोर
बैठक में संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने भी कहा कि किसी भी देश और उसके स्थानीय समुदायों को अपने प्राकृतिक संसाधनों का सबसे पहले और सबसे अधिक लाभ मिलना चाहिए। भारत ने इस विचार का समर्थन करते हुए कहा कि संसाधनों का न्यायपूर्ण उपयोग ही स्थायी विकास, सामाजिक न्याय और क्षेत्रीय शांति का आधार बन सकता है।
प्रफुल्ल तिवारी
एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।
