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लाठीचार्ज के बाद जूडा का फूटा गुस्सा : पाॅलिटेक्निक से हमीदिया तक जाम किया रास्ता, ऐसोसिएशन ने भी सरकार को चेताया

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Sep 08, 2026
07:40 AM
पाॅलिटेक्निक से हमीदिया तक जाम किया रास्ता, ऐसोसिएशन ने भी सरकार को चेताया

भोपाल। राजधानी भोपाल में स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे एमबीबीएस इंटनर्स पर पुलिस द्वारा बल प्रयोग किए जाने के बाद जूनियर डाॅक्टरों का गुस्सा सड़क पर आ गया है। कमला पार्क में रातभर धरना-प्रदर्शन करने के बाद मंगलवार की सुबह सड़क पर उतर आए हैं। बड़ी संख्या में जूनियर डाॅक्टरों के सड़क पर धरना देने से यातायात व्यवस्था पर भी चरमरा गई। पाॅलिटेक्निक चैराहे से हमीदिया अस्पताल तक लंबा जाम लग गया। यातायात बाधित होने से जहां मरीजों और उनके परिजनों को परेशानी का सामना करना पड़ा। वहीं राहगीर भी परेशान होते रहे।

लाठीचार्ज ने बढ़ाया विवाद

वहीं डॉक्टरों ने अपना गुस्सा जाहिर करते हुए कहा कि उनका आंदोलन पहले केवल स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग तक सीमित था, लेकिन मुख्यमंत्री निवास की ओर मार्च के दौरान पुलिस कार्रवाई के बाद उनकी मांगों में नए मुद्दे जुड़ गए हैं। अब आंदोलनकारी घायल डॉक्टरों को मुआवजा देने, कथित लाठीचार्ज के लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई करने और पुलिस से माफी की मांग कर रहे हैं। डॉक्टरों का दावा है कि वे करीब दो महीने से शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग उठा रहे थे, लेकिन कोई ठोस समाधान नहीं निकला।

मेडिकल टीचर्स एसोसिएशन भी समर्थन में

मेडिकल टीचर्स एसोसिएशन भोपाल के सचिव डॉ. अविनाश ठाकुर ने इंटर्न डॉक्टरों का समर्थन करते हुए कहा कि छात्रों के खिलाफ बल प्रयोग उचित नहीं है। उन्होंने चेतावनी दी कि मांगों पर जल्द निर्णय नहीं हुआ तो आंदोलन व्यापक रूप ले सकता है। एसोसिएशन की दोपहर एक बजे होने वाली सामान्य सभा में आगे की रणनीति पर चर्चा की जाएगी।

फिलहाल सड़क पर जारी प्रदर्शन और अस्पताल की प्रभावित व्यवस्था ने सरकार के सामने चुनौती बढ़ा दी है। अब नजर इस बात पर है कि सरकार स्टाइपेंड और पुलिस कार्रवाई से जुड़े मुद्दों पर क्या फैसला लेती है।

हमीदिया की नियमित सेवाएं प्रभावित

डॉक्टरों के आंदोलन का असर हमीदिया अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं पर भी दिखाई दे रहा है। इंटर्न और जूनियर डॉक्टरों के प्रदर्शन में शामिल होने से नियमित व्च्क् और तय ऑपरेशन प्रभावित हुए हैं। हालांकि अस्पताल में इमरजेंसी सेवाएं जारी हैं और गंभीर मरीजों को तत्काल उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है।

जूनियर डॉक्टरों की संख्या अस्पताल की नियमित व्यवस्था में महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में उनके आंदोलन के कारण आने वाले दिनों में ऑपरेशन और अन्य सेवाओं पर असर बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

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एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।

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