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सागर जहरीली शराब कांड : जीतू पटवारी ने सरकार को घेरा, न्यायिक जांच मांग कर अधिकारियों की जवाबदेही तय करने सीएम को लिखा पत्र

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Sep 08, 2026
09:48 AM
जीतू पटवारी ने सरकार को घेरा, न्यायिक जांच मांग कर अधिकारियों की जवाबदेही तय करने सीएम को लिखा पत्र

भोपाल। सागर जिले के बंडा क्षेत्र में जहरीली शराब पीने से हुई मौतों के बाद मध्य प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। कांग्रेस ने इस घटना को प्रशासनिक लापरवाही का गंभीर मामला बताते हुए सरकार पर सवाल उठाए हैं। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर पूरे मामले की स्वतंत्र न्यायिक जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि यह केवल अवैध शराब से हुई मौतों का मामला नहीं, बल्कि सरकारी तंत्र की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल है।

मौतों के बाद जागा प्रशासन, पहले कार्रवाई क्यों नहीं?

पटवारी ने कहा कि सागर की घटना ने कई परिवारों को उजाड़ दिया है। जिन घरों में कुछ दिन पहले तक खुशियां थीं, वहां अब मातम पसरा है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि क्षेत्र में अवैध शराब के कारोबार की जानकारी और शिकायतें प्रशासन तक पहुंच रही थीं, तो समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की गई। मौतों के बाद सक्रिय हुआ प्रशासन इससे पहले कहां था, सरकार को इसका जवाब देना चाहिए।

बड़े अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने की मांग

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने वाणिज्यिक कर विभाग के प्रमुख सचिव अमित राठौर और आबकारी आयुक्त दीपक सक्सेना की जवाबदेही तय करने की मांग की। पटवारी का कहना है कि केवल कार्यालयों में बैठकर नीतियां बनाने से जिम्मेदारी पूरी नहीं होती। शराब के अवैध कारोबार पर निगरानी, स्थानीय स्तर पर कार्रवाई और अधिकारियों की प्रभावी निगरानी व्यवस्था भी सुनिश्चित की जानी चाहिए।

ललितपुर से सागर तक फैले नेटवर्क पर सवाल

पटवारी ने जहरीली शराब के कथित रूप से ललितपुर से सागर तक पहुंचने का मुद्दा उठाते हुए पूरे नेटवर्क की जांच की मांग की। उन्होंने कहा कि यह पता लगाया जाना जरूरी है कि नकली शराब केवल स्थानीय स्तर पर तैयार हुई या इसके तार अंतरराज्यीय अवैध कारोबार से जुड़े हैं। यदि शराब दूसरे राज्य से मध्य प्रदेश पहुंची तो सीमा और परिवहन तंत्र की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए।

मृतकों की सूची सार्वजनिक करने की मांग

पटवारी ने सरकार से मृतकों की प्रमाणित सूची सार्वजनिक करने, सभी पीड़ितों को बेहतर उपचार और उचित आर्थिक सहायता देने की मांग की। साथ ही उन्होंने कहा कि दोषी अधिकारियों के खिलाफ केवल तबादले या निलंबन जैसी कार्रवाई पर्याप्त नहीं होगी। जिम्मेदार लोगों के खिलाफ आपराधिक धाराओं में मामला दर्ज कर कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए।

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