राजसी ठाठ में सिंधिया परिवार का दशहरा : ज्योतिरादित्य ने कुलदेवताओं के दर्शन कर निभाई सदियों पुरानी परंपरा, मांढरे वाली माता के दर्शन और पूर्वजों को किया नमन

ग्वालियर। राजसी परंपरा, धार्मिक आस्था और ऐतिहासिक विरासत के संगम के बीच केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने विजयादशमी पर ग्वालियर में सिंधिया राजपरिवार की पीढ़ियों से चली आ रही परंपराओं का निर्वहन किया। पारंपरिक वेशभूषा में अपने पुत्र महाआर्यमन सिंधिया के साथ पहुंचे केंद्रीय मंत्री ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और कुलदेवताओं का आशीर्वाद लिया। इस दौरान दशहरे पर सिंधिया परिवार की धार्मिक परंपराओं की झलक देखने को मिली।
गोरखी मंदिर में कुलदेवताओं की पूजा
विजयादशमी के अवसर पर केंद्रीय मंत्री सिंधिया सबसे पहले ग्वालियर स्थित अपने पैतृक गोरखी मंदिर के देवघर पहुंचे। यहां उन्होंने विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर कुलदेवताओं का आशीर्वाद लिया। इसके पश्चात वे मांढरे वाली माता मंदिर पहुंचे और माता के दर्शन कर पूजा-अर्चना की। सिंधिया परिवार की दशहरा परंपरा में मांढरे वाली माता के दर्शन और शमी पूजन का विशेष महत्व रहा है।
छतरी पहुंचकर पूर्वजों को किया नमन
धार्मिक अनुष्ठानों के बाद केंद्रीय मंत्री सिंधिया छतरी पहुंचे, जहां उन्होंने अपने पूर्वजों का स्मरण करते हुए उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन किया। इन आयोजनों के माध्यम से उन्होंने परिवार की ऐतिहासिक विरासत और पीढ़ियों से चली आ रही परंपराओं के प्रति अपनी आस्था व्यक्त की। सिंधिया राजपरिवार में विजयादशमी पर पारंपरिक वेशभूषा में पूजा-अर्चना और शस्त्र पूजन की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है। यह परंपरा भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों के साथ शक्ति, साहस और कर्तव्य के प्रतीकों से जुड़ी मानी जाती है।
देशवासियों को दी विजयादशमी की शुभकामनाएं
इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री सिंधिया ने सभी देशवासियों को विजयादशमी की शुभकामनाएं देते हुए सुख, समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना की। विजयादशमी असत्य पर सत्य और अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक है। ग्वालियर में सिंधिया परिवार की पारंपरिक पूजा-अर्चना ने ऐतिहासिक विरासत, सांस्कृतिक आस्था और पारिवारिक परंपराओं की निरंतरता को रेखांकित किया।
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