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शक्कर महंगी, स्वाद कड़वा : खड़गे ने सरकार से पूछा- त्योहारों से पहले मिठास पर महंगाई की मार क्यो? एथेनाॅल नीति पर भी मांगा जवाब

प्रफुल्ल तिवारी

प्रफुल्ल तिवारी

Aug 22, 2026
08:16 AM
खड़गे ने सरकार से पूछा- त्योहारों से पहले मिठास पर महंगाई की मार क्यो? एथेनाॅल नीति पर भी मांगा जवाब

नई दिल्ली। त्योहारी सीजन में शक्कर की बढ़ती कीमतों ने आमम आदमी पर महंगाई का बड़ा भार डाल दिया है। बीते सप्ताह जहां शक्कर 50 रुपए प्रति किलो के हिसाब से बिक रही थी। वहीं अब एक किलो चीनी का भाव 65 से 70 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गया है। शक्कर की बढ़ती कीमतों पर सियासी पारा भी हाई हो गया है। विपक्षी दलों ने केन्द्र सरकार को अपने निशाने पर ले लिया है। इसी क्रम में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने चीनी के घटते भंडार और बढ़ते दाम को लेकर केन्द्र सरकार पर तीखा हमला बोला है।

नौ साल के निचले स्तर पर भंडार का दावा

मल्लिकार्जुन खड़गे ने सोशल मीडिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि दुनिया के प्रमुख चीनी उत्पादक और निर्यातक देशों में शामिल भारत में चीनी का भंडार कथित तौर पर नौ साल के निचले स्तर तक कैसे पहुंच गया। उन्होंने सरकार से पूछा कि घरेलू स्तर पर उपलब्धता कम होने की स्थिति आखिर क्यों बनी और इसके पीछे जिम्मेदार नीतियां कौन-सी हैं।

कांग्रेस अध्यक्ष ने यह भी सवाल उठाया कि स्थिति ऐसी क्यों बनी कि सरकार को चीनी के निर्यात पर रोक लगाने के साथ-साथ बड़ी मात्रा में चीनी को बिना शुल्क के विदेश से मंगाने का फैसला करना पड़ा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की नीतियों के चलते आम लोगों के लिए त्योहारों की मिठास महंगी होती जा रही है। खड़गे ने सरकार से चीनी के मौजूदा भंडार, कीमतों में वृद्धि और एथेनॉल नीति को लेकर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की।

कीमतों में बढ़ोतरी को लेकर सरकार को घेरा

खड़गे ने चीनी की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। उनके मुताबिक, पिछले तीन महीनों में चीनी के दाम में करीब 40 प्रतिशत तक वृद्धि हुई है। उन्होंने सवाल किया कि त्योहारों से ठीक पहले आम उपभोक्ताओं पर बढ़े हुए खर्च का बोझ क्यों डाला जा रहा है और इसके लिए जवाबदेही किसकी है। उन्होंने कहा कि त्योहारों के दौरान मिठाइयों और अन्य खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ती है। ऐसे समय में चीनी महंगी होने का सीधा असर आम परिवारों के बजट पर पड़ सकता है।

एथेनॉल नीति पर भी मांगा जवाब

कांग्रेस अध्यक्ष ने चीनी की उपलब्धता को एथेनॉल नीति से जोड़ते हुए केंद्र सरकार से सवाल किया। उन्होंने पूछा कि जब घरेलू बाजार में चीनी की कमी बताई जा रही है और विदेश से चीनी मंगाने की जरूरत पड़ रही है, तब गन्ने और अनाज से एथेनॉल उत्पादन को बढ़ावा देने वाली नीति की समीक्षा क्यों नहीं की जा रही है।

खड़गे ने सरकार की आत्मनिर्भरता संबंधी नीतियों पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि एक तरफ घरेलू चीनी उत्पादन और भंडार को लेकर चिंता है, दूसरी ओर आयात की जरूरत पड़ रही है। उन्होंने इसी विरोधाभास को लेकर केंद्र सरकार से स्पष्ट जवाब मांगा।

त्योहारों से पहले गरमाया राजनीतिक मुद्दा

चीनी की कीमतों और उपलब्धता का मुद्दा ऐसे समय सामने आया है, जब देश में त्योहारों की तैयारियां शुरू हो रही हैं। ऐसे में कांग्रेस ने इसे महंगाई और सरकारी नीतियों से जोड़कर केंद्र पर हमला तेज कर दिया है। खड़गे के सवालों से आने वाले दिनों में चीनी की कीमत, भंडार और एथेनॉल नीति को लेकर राजनीतिक बहस और तेज होने के आसार हैं।

प्रफुल्ल तिवारी
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प्रफुल्ल तिवारी

एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।

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