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श्रमिकों के लिए आसान होंगे नए श्रम कानून : मंत्री पटेल ने नियमों को सरल और हितकारी बनाने के निर्देश, प्रवासी मजदूरों के लिए बनेगा डिजिटल पोर्टल

प्रफुल्ल तिवारी

प्रफुल्ल तिवारी

Jul 01, 2026
09:53 AM
मंत्री पटेल ने नियमों को सरल और हितकारी बनाने के निर्देश, प्रवासी मजदूरों के लिए बनेगा डिजिटल पोर्टल

भोपाल। मध्यप्रदेश सरकार नई श्रम संहिताओं के राज्य नियमों को अधिक श्रमिक-केंद्रित और व्यवहारिक बनाने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास एवं श्रम मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने विभागीय समीक्षा बैठक में स्पष्ट निर्देश दिए कि राष्ट्रीय फ्लोर वेज और न्यूनतम मजदूरी तय करते समय कृषि श्रमिकों की कार्यकुशलता, बाजार की वास्तविक स्थिति तथा विशेष रूप से जनजातीय क्षेत्रों में प्रचलित मजदूरी दरों का गहन अध्ययन किया जाए। उन्होंने कहा कि मजदूरी निर्धारण की प्रक्रिया पूरी तरह यथार्थपरक और श्रमिक हितों के अनुरूप होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि नई श्रम संहिताओं का उद्देश्य केवल कानूनी बदलाव नहीं, बल्कि श्रमिकों को अधिक सामाजिक सुरक्षा और नियोक्ताओं के साथ बेहतर समन्वय उपलब्ध कराना है। मंत्री ने श्रमिक कल्याण मंडलों में अनुभवी सामाजिक कार्यकर्ताओं को शामिल करने, असंगठित श्रमिकों के लिए समूह बीमा योजना को अधिक प्रभावी बनाने तथा संबल योजना का दायरा बढ़ाने के निर्देश दिए। उन्होंने बीमा न्यायालय की कार्यप्रणाली, अर्द्धन्यायिक व्यवस्था और श्रमिकों को समयबद्ध न्याय सुनिश्चित करने वाले प्रावधानों को भी अधिक स्पष्ट और संवेदनशील बनाने पर जोर दिया।

पत्रकारों और प्रवासी श्रमिकों के लिए विशेष प्रावधान

मंत्री पटेल ने श्रमजीवी पत्रकारों से जुड़े नियमों पर चर्चा करते हुए कहा कि किसी भी नए प्रावधान को अंतिम रूप देने से पहले पत्रकार संगठनों और उनके प्रतिनिधियों से व्यापक संवाद किया जाए। वहीं, अंतरराज्यीय प्रवासी श्रमिकों के ऑनलाइन पंजीयन के लिए आधुनिक डिजिटल पोर्टल विकसित करने पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि इससे प्रवासी श्रमिकों का सटीक डेटाबेस तैयार होगा और जरूरत पड़ने पर उन्हें समय पर सहायता व सामाजिक सुरक्षा उपलब्ध कराई जा सकेगी। उन्होंने पंचायत सचिवों और नगरीय निकायों के वार्ड स्तर के अधिकारियों की जिम्मेदारी भी तय करने के निर्देश दिए।

तकनीक आधारित होगी नई व्यवस्था

बैठक में श्रमिक दुर्घटनाओं की त्वरित सूचना और सहायता के लिए सक्रिय पोर्टल एवं टोल-फ्री हेल्पलाइन विकसित करने, ट्रांसजेंडर और दिव्यांगजनों के लिए कार्यस्थलों पर स्वास्थ्य, स्वच्छता और गरिमापूर्ण सुविधाएं सुनिश्चित करने तथा निरीक्षक प्रणाली की जगह सुविधा प्रदाता (फैसिलिटेटर) आधारित व्यवस्था लागू करने पर भी चर्चा हुई।

विभाग के सचिव रघुराज राजेन्द्रन ने बताया कि 29 केंद्रीय श्रम कानूनों को समाहित कर चार नई श्रम संहिताएं तैयार की गई हैं। इनमें तकनीक आधारित पंजीयन, 24×7 संस्थान संचालन, पृथक बीमा न्यायालय, राष्ट्रीय फ्लोर वेज, गिग एवं प्लेटफॉर्म कर्मकारों की सामाजिक सुरक्षा, फिक्स्ड टर्म कर्मचारियों को एक वर्ष की सेवा पर ग्रेच्युटी तथा श्रमजीवी पत्रकारों और अंतरराज्यीय प्रवासी श्रमिकों के लिए नए प्रावधान शामिल किए गए हैं। बैठक में विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।

प्रफुल्ल तिवारी
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प्रफुल्ल तिवारी

एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।

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