झारखंड जेपीएससी-जेएसएससी भर्ती घोटालाः : पोस्टरों में छलका युवाओं का दर्द, सोशल मीडिया में वायरल, अनुशासित आंदोलन ने खींचा ध्यान

नई दिल्ली। झारखंड में जेपीएससी और जेएसएससी भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी के खिलाफ छात्रों और अभ्यर्थियों का आंदोलन आक्रोश में बदलता जा रहा है। राजधानी रांची स्थित जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में बीते दो सप्ताह से जारी सत्याग्रह आंदोलन अब धीरे-धीरे चर्चा का विषय भी बनता जा रहा है। आंदोलनकारी छात्र पोस्टरों-बैनरों के जरिए सरकार को जगाने की कोशिश कर रहे हैं। उनके इस अनोखे प्रदर्शन का वीडियो भी सोशल वायरल हो रहा है। युवाओं ने वीडियों में बेरोजगारी और भर्ती में हो रही देरी का असर अपनी निजी जिंदगी से जोड़ते हुए सरकार तक अपना संदेश पहुंचाने की कोशिश की।
पोस्टरों में झलका युवाओं का दर्द
प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि वर्षों से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने के बावजूद उन्हें नौकरी नहीं मिल रही है। आर्थिक आत्मनिर्भरता के बिना वे न तो अपने भविष्य की योजना बना पा रहे हैं और न ही शादी जैसे महत्वपूर्ण फैसले ले सकते हैं। इसी भावना को उन्होंने नो जॉब, नो शादी जैसे नारों के जरिए सामने रखा, जिसने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।
भर्ती प्रक्रिया पर उठाए गंभीर सवाल
रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम और बापू वाटिका के आसपास चल रहे इस आंदोलन में अभ्यर्थियों ने झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) की भर्ती परीक्षाओं में कथित पेपर लीक, कटऑफ जारी नहीं करने और मूल्यांकन में गड़बड़ी के आरोप लगाए हैं। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि पूरे मामले की स्वतंत्र सीबीआई जांच कराई जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो।
अनुशासित आंदोलन ने खींचा ध्यान
इस प्रदर्शन की सबसे खास बात इसका अनुशासित स्वरूप है। छात्र नेताओं ने आंदोलन को पूरी तरह गैर-राजनीतिक बनाए रखने का फैसला किया है। प्रदर्शन स्थल पर राजनीतिक, धार्मिक या अन्य विवादित नारे लगाने की अनुमति नहीं दी जा रही है। वायरल वीडियो में छात्र बाहरी समूहों को यह कहते हुए रोकते नजर आए कि यह रांची है, जंतर-मंतर नहीं। यह छात्रों का अपना आंदोलन है।
बारिश में भी जारी है संघर्ष
लगातार बारिश और खराब मौसम के बावजूद सैकड़ों छात्र अनिश्चितकालीन धरने और भूख हड़ताल पर डटे हुए हैं। आंदोलन को देखते हुए राज्य सरकार ने छात्र प्रतिनिधियों से बातचीत के लिए एक उच्च स्तरीय समिति गठित की है। हालांकि, प्रदर्शनकारी तब तक आंदोलन जारी रखने की बात कह रहे हैं, जब तक उनकी मांगों पर ठोस फैसला नहीं लिया जाता। अपने रचनात्मक पोस्टरों, अनुशासित प्रदर्शन और रोजगार के सवाल को नए अंदाज में उठाने के कारण रांची का यह आंदोलन देशभर में चर्चा का केंद्र बन गया है।
प्रफुल्ल तिवारी
एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।
