शिक्षक दिवस : सम्मानित शिक्षकों से पीएम का संवाद, शिक्षा को के किताबों तक सीमित नहीं रखने का दिया संदेश, कहा- पहचानें बच्चों की छिपी प्रतिभा

नई दिल्ली। शिक्षक दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को देश के शिक्षकों के योगदान को नमन करते हुए कहा कि यह दिन समाज में शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका को सम्मान देने का अवसर है। उन्होंने डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन को भी श्रद्धांजलि दी। प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार पाने वाले शिक्षकों के साथ हुई मुलाकात और संवाद की झलकियां साझा करते हुए शिक्षा को केवल किताबों और पाठ्यक्रम तक सीमित न रखने का संदेश दिया।
‘हर बच्चे में कोई न कोई खासियत’
राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार विजेताओं से बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री ने कहा कि संभव है कोई बच्चा पढ़ाई में बहुत अच्छा न हो, लेकिन परमात्मा ने हर व्यक्ति को कोई न कोई ताकत और प्रतिभा दी है। उन्होंने शिक्षकों से पूछा कि वे बच्चों के भीतर छिपे हुनर को पहचानने के लिए किस तरह प्रयास करते हैं।
एक शिक्षिका ने बताया कि उनकी कक्षा के हर बच्चे की अलग खूबी, प्रतिभा और चुनौती है और शिक्षक के तौर पर वह इन क्षमताओं को पहचानने की कोशिश करती हैं। प्रधानमंत्री ने इस प्रयास को बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए महत्वपूर्ण बताया।
‘आपका ऑरा देखकर मुझे डाउट हो गया’
संवाद के दौरान एक शिक्षिका ने बताया कि वह बच्चों को रसायन विज्ञान के साथ पर्यावरण शिक्षा और सार्वजनिक भाषण की कला भी सिखाती हैं। प्रधानमंत्री ने उनसे पूछा कि अगर वह उनके विद्यार्थी होते और अच्छा वक्ता बनना चाहते तो उन्हें क्या करना चाहिए।
शिक्षिका ने आत्मविश्वास को जरूरी बताया, लेकिन प्रधानमंत्री की ओर देखकर मजाकिया अंदाज में कहा कि उनका ‘ऑरा’ देखकर उन्हें थोड़ा संदेह हो गया। इस पर प्रधानमंत्री और शिक्षिका दोनों हंस पड़े। बातचीत का यह हल्का-फुल्का अंदाज भी चर्चा में रहा।
बच्चे बन रहे रिपोर्टर
एक अन्य शिक्षिका ने बताया कि वह बच्चों को नवाचारी तरीके से साक्षात्कार लेना सिखाती हैं। प्रधानमंत्री ने मजाकिया अंदाज में पूछा कि क्या बच्चे घर जाकर अपने माता-पिता का भी इंटरव्यू लेते हैं? उन्होंने पूछा कि बच्चे घर में खाना बनाने से लेकर बजट तक पर सवाल करते होंगे। शिक्षिका ने जवाब दिया कि उनके स्कूल के सभी बच्चे रिपोर्टर बनना चाहते हैं।
स्क्रीन टाइम और नशे पर भी चिंता
प्रधानमंत्री ने बच्चों में बढ़ते स्क्रीन टाइम को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि मोबाइल और स्क्रीन की आदत से बच्चों को बाहर निकालने के लिए उन्हें खेलकूद और रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ना जरूरी है। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रम बच्चों की नियमित आदत का हिस्सा बनने चाहिए।
नशे को लेकर प्रधानमंत्री ने शिक्षकों से बच्चों के व्यवहार में होने वाले बदलावों पर बारीकी से नजर रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि शिक्षा जगत को किताबों और पाठ्यक्रम से आगे बढ़कर बच्चों की जिंदगी में झांकना होगा। बचपन को बचाए रखने की सबसे बड़ी जिम्मेदारी शिक्षक निभा सकते हैं।
शिक्षक ही पहचानें बच्चों की छिपी प्रतिभा
प्रधानमंत्री ने कहा कि शिक्षक केवल विषय पढ़ाने वाले नहीं, बल्कि बच्चों के व्यक्तित्व को दिशा देने वाले मार्गदर्शक हैं। उन्होंने शिक्षकों से बच्चों की प्रतिभा, व्यवहार और जरूरतों को समझकर उन्हें आगे बढ़ाने का आह्वान किया।
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