कांग्रेस के लिए परीक्षा की घड़ी, : पंजाब में बगावत से सियासी भूचाल: चन्नी के तेवर तेज, भाजपा ने खोले दरवाजे

चंडीगढ़। पंजाब कांग्रेस में नेतृत्व को लेकर उठे विरोध के सुर अब खुली बगावत का रूप लेते दिखाई दे रहे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने पार्टी हाईकमान के फैसले पर सवाल उठाकर प्रदेश की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। विधानसभा चुनाव से पहले सामने आई इस नाराजगी ने कांग्रेस की अंदरूनी खींचतान को एक बार फिर उजागर कर दिया है। दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी ने इस घटनाक्रम को अपने लिए अवसर के रूप में देखते हुए साफ संकेत दिए हैं कि पार्टी में आने वाले नेताओं का स्वागत किया जाएगा।
चन्नी की नाराजगी ने बढ़ाई कांग्रेस की मुश्किल
पार्टी सूत्रों के अनुसार कांग्रेस नेतृत्व ने पंजाब में मौजूदा संगठनात्मक व्यवस्था को बनाए रखने का फैसला किया है, जिससे पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी नाराज बताए जा रहे हैं। चन्नी ने अपने समर्थक विधायकों, पूर्व मंत्रियों और अन्य नेताओं के साथ बैठक कर शक्ति प्रदर्शन किया। इसे हाईकमान पर दबाव बनाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। विधानसभा चुनाव से ठीक पहले इस घटनाक्रम ने कांग्रेस के सामने नई राजनीतिक चुनौती खड़ी कर दी है।
चुनावी तैयारी के बीच बढ़ी चिंता
पंजाब में कुछ ही महीनों बाद विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे समय में पार्टी के भीतर खुलकर सामने आया असंतोष कांग्रेस के चुनावी अभियान को प्रभावित कर सकता है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि मतभेद जल्द नहीं सुलझे तो इसका सीधा असर चुनावी रणनीति और संगठन पर पड़ सकता है।
भाजपा ने दिया खुला संदेश
कांग्रेस में बढ़ती खींचतान के बीच भाजपा ने अपने राजनीतिक संकेत भी स्पष्ट कर दिए हैं। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने कहा कि भाजपा एक बड़ा परिवार है और पार्टी में आने वाले हर नेता का स्वागत है। उनके इस बयान को कांग्रेस के असंतुष्ट नेताओं के लिए खुला निमंत्रण माना जा रहा है। भाजपा लंबे समय से पंजाब में अपना जनाधार बढ़ाने की कोशिश कर रही है। पार्टी का मानना है कि कांग्रेस में चल रही अंदरूनी कलह उसके लिए राजनीतिक अवसर बन सकती है। सूत्रों के अनुसार कांग्रेस के कुछ नाराज नेता भाजपा के वरिष्ठ नेताओं के संपर्क में बताए जा रहे हैं। हालांकि इस संबंध में किसी भी पक्ष की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
रंधावा की मुलाकात से बढ़ीं चर्चाएं
इसी बीच सांसद और पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा की केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात ने भी राजनीतिक हलकों में चर्चाओं को हवा दी। हालांकि रंधावा ने इन अटकलों को खारिज करते हुए कहा कि मुलाकात को राजनीतिक नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए और इसका दल बदल से कोई संबंध नहीं है।
हाईकमान के सामने नई चुनौती
बताया जा रहा है कि कांग्रेस नेतृत्व पहले ही पंजाब के वरिष्ठ नेताओं से अलग-अलग बातचीत कर संगठन में बदलाव न करने के फैसले पर सहमति बनाने की कोशिश कर चुका था। इसके बावजूद चन्नी समर्थकों की सक्रियता ने यह संकेत दिया है कि असंतोष पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि कांग्रेस हाईकमान आगे क्या कदम उठाता है। चन्नी की बैठक में सभी विधायक और सांसद शामिल नहीं हुए। कई वरिष्ठ नेताओं की दूरी को हाईकमान के प्रति समर्थन के रूप में देखा जा रहा है। इससे यह भी संकेत मिला कि पार्टी के भीतर सभी नेता चन्नी की रणनीति से सहमत नहीं हैं।
कांग्रेस के लिए परीक्षा की घड़ी
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यदि कांग्रेस नेतृत्व समय रहते मतभेद दूर नहीं कर पाया तो विपक्ष इस मुद्दे का चुनाव में लाभ उठाने की कोशिश करेगा। वहीं भाजपा लगातार इस पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है और राजनीतिक परिस्थितियों का फायदा उठाने की रणनीति पर काम कर रही है।
अब फैसले पर टिकी नजर
पंजाब कांग्रेस में मचे इस सियासी घमासान के बीच अब सबसे अहम सवाल यही है कि पार्टी हाईकमान क्या रुख अपनाता है। यदि नेतृत्व अपने फैसले पर कायम रहता है तो असंतुष्ट नेताओं की अगली रणनीति प्रदेश की राजनीति की दिशा तय कर सकती है। वहीं भाजपा भी किसी भी संभावित राजनीतिक बदलाव का लाभ उठाने के लिए पूरी तरह तैयार दिखाई दे रही है।
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