स्वच्छ ऊर्जा में भारत की बड़ी छलांग : 2032 तक 100 गीगावाट पहुंचेगी रिन्यूएबल क्षमता, उद्योगों और डेटा सेंटरों में बढ़ेगा सबसे ज्यादा इस्तेमाल

नई दिल्ली। भारत का कमर्शियल और इंडस्ट्रियल (सीएंडआई) रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर आने वाले वर्षों में तेज़ी से विस्तार करने जा रहा है। एक नई रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2025 में 32 गीगावाट की मौजूदा क्षमता बढ़कर 2032 तक 100 गीगावाट तक पहुंच सकती है। इसी अवधि में ऊर्जा भंडारण प्रणाली (एनर्जी स्टोरेज सिस्टम) की स्थापित क्षमता भी दस गुना से अधिक बढ़कर 31 गीगावाट-घंटा होने का अनुमान है। विशेषज्ञों का मानना है कि स्वच्छ ऊर्जा की बढ़ती मांग और राज्यों की नई नीतियां इस बदलाव की प्रमुख वजह बनेंगी।
डीकार्बोनाइजेशन और महंगी बिजली से बढ़ रही मांग
इंडिया एनर्जी स्टोरेज एलायंस और कस्टमाइज्ड एनर्जी सॉल्यूशंस की रिपोर्ट में कहा गया है कि कंपनियों के डीकार्बोनाइजेशन लक्ष्यों, बढ़ते ग्रिड टैरिफ और ऊर्जा सुरक्षा की जरूरत ने रिन्यूएबल एनर्जी तथा स्टोरेज सिस्टम की मांग को तेज कर दिया है। राज्यों द्वारा लागू की जा रही नई नियामकीय नीतियां भी स्वच्छ ऊर्जा अपनाने की रफ्तार बढ़ा रही हैं।
इंडिया एनर्जी स्टोरेज वीक में होगी रिपोर्ट पेश
यह रिपोर्ट 8 से 10 जुलाई तक नई दिल्ली के यशोभूमि (आईआईसीसी) में आयोजित होने वाले 'इंडिया एनर्जी स्टोरेज वीक (आईईएसडब्ल्यू) 2026' के दौरान प्रस्तुत की जाएगी। इस आयोजन में 200 से अधिक प्रदर्शक और 10 हजार से ज्यादा उद्योग विशेषज्ञ शामिल होंगे। कार्यक्रम के दौरान स्वच्छ ऊर्जा, ऊर्जा भंडारण, नई तकनीकों और नीति सुधारों पर विस्तृत चर्चा होगी।
राज्यों की नई नीतियां देंगी रफ्तार
रिपोर्ट में महाराष्ट्र की नई रिन्यूएबल एनर्जी एवं स्टोरेज नीति का विशेष उल्लेख किया गया है। इसके तहत 100 किलोवाट से अधिक क्षमता वाले प्रत्येक नए रिन्यूएबल प्रोजेक्ट में स्टोरेज सुविधा अनिवार्य की गई है। साथ ही बिजली वितरण कंपनियों को वर्ष 2035-36 तक अपनी कुल बिजली का 10 प्रतिशत हिस्सा स्टोरेज सिस्टम से प्राप्त करना होगा। गुजरात, कर्नाटक, तमिलनाडु और राजस्थान भी बैंकिंग, सेटलमेंट नीति और ट्रांसमिशन शुल्क में रियायत जैसे कदमों के जरिए इस क्षेत्र को बढ़ावा दे रहे हैं।
उद्योग और डेटा सेंटर होंगे सबसे बड़े उपभोक्ता
रिपोर्ट के अनुसार, ऊर्जा भंडारण तकनीक अपनाने में औद्योगिक इकाइयां सबसे आगे रहेंगी और कुल स्टोरेज क्षमता में इनकी हिस्सेदारी आधे से अधिक रहने की संभावना है। वहीं डेटा सेंटर, अस्पताल, मेट्रो, रेलवे स्टेशन और एयरपोर्ट जैसे महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा क्षेत्रों में भी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम का तेजी से विस्तार होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव भारत के स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्य को हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
प्रफुल्ल तिवारी
एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।
