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जीएसटी संग्रह से भरा सरकार का खजाना : मई में खाते में आए 1.94 लाख करोड़, आयात और नेट राजस्व में दिखी मजबूती

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Jun 01, 2026
07:36 AM
मई में खाते में आए 1.94 लाख करोड़, आयात और नेट राजस्व में दिखी मजबूती

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद भारत की कर व्यवस्था के लिए एक सकारात्मक संकेत सामने आया है। सोमवार को जारी सरकारी आंकड़ों के अनुसार मई महीने में सकल वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) संग्रह में सालाना आधार पर 3.2 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई और यह करीब 1.94 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गया। यह प्रदर्शन सरकार के लिए राजस्व स्थिरता और आर्थिक गतिविधियों की मजबूती का संकेत माना जा रहा है।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार मई 2025 में सकल जीएसटी राजस्व 1,94,184 करोड़ रुपए रहा, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 1,88,172 करोड़ रुपए था। इसी दौरान शुद्ध जीएसटी राजस्व भी बढ़कर 1,66,904 करोड़ रुपए हो गया, जो सालाना आधार पर 3.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। यह वृद्धि ऐसे समय में हुई है जब वैश्विक अनिश्चितताएं और व्यापारिक दबाव लगातार बने हुए हैं।

कुल रिफंड में 2.6 फीसदी की वृद्धि

महीने के दौरान कुल रिफंड में भी 2.6 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई और यह 27,281 करोड़ रुपए तक पहुंच गया। हालांकि रिफंड समायोजन के बाद वास्तविक प्रभावी वृद्धि और भी बेहतर रही। रिपोर्ट के अनुसार रिफंड को समायोजित करने के बाद मई 2026 में सकल जीएसटी राजस्व वृद्धि लगभग 9 प्रतिशत रही, जबकि घरेलू समायोजित सकल जीएसटी वृद्धि लगभग 5 प्रतिशत आंकी गई।

घरेलू जीएसटी संग्रह में हल्की गिरावट

घरेलू जीएसटी संग्रह में हल्की गिरावट दर्ज की गई और यह 1,34,530 करोड़ रुपए रहा, जो पिछले वर्ष की तुलना में 2.6 प्रतिशत कम है। इसके विपरीत आयात से प्राप्त जीएसटी राजस्व में मजबूत उछाल देखने को मिला और यह 19.1 प्रतिशत बढ़कर 59,654 करोड़ रुपए तक पहुंच गया। यह संकेत देता है कि आयात आधारित व्यापार गतिविधियों में तेजी बनी हुई है।

मजबूत आर्थिक गतिविधियों का संकेत

वित्त वर्ष 2026-27 के पहले दो महीनों में कुल सकल जीएसटी संग्रह 6.2 प्रतिशत बढ़कर 4.37 लाख करोड़ रुपए हो गया है, जबकि शुद्ध राजस्व 5.5 प्रतिशत बढ़कर 3.78 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गया। अप्रैल 2025 में जीएसटी संग्रह ने रिकॉर्ड स्तर 2,42,702 करोड़ रुपए हासिल किया था, जो मजबूत आर्थिक गतिविधियों का संकेत था।

सरकार का यह है मानना

सरकार का मानना है कि लगातार बढ़ता जीएसटी संग्रह वित्तीय अनुशासन और राजस्व लक्ष्य को पूरा करने की दिशा में सकारात्मक संकेत है। विशेषज्ञों के अनुसार यह रुझान अर्थव्यवस्था में स्थिरता और उपभोग मांग की मजबूती को दर्शाता है।

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