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मध्य पूर्व संकटः पीएम मोदी की अपील पर चर्चा तेज : शरद पवार ने सर्वदलय बैठक बुनाने की मांग, कहा- अर्थव्यवस्था पर घोषणाओं का हो सकता है गहरा असर

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May 12, 2026
09:38 AM
शरद पवार ने सर्वदलय बैठक बुनाने की मांग, कहा- अर्थव्यवस्था पर घोषणाओं का हो सकता है गहरा असर

नई दिल्ली। मध्य पूर्व में जारी अस्थिरता और युद्ध जैसे हालात के बीच भारत की आर्थिक नीतियों और हालिया सरकारी अपीलों को लेकर राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एसपी) के अध्यक्ष शरद पवार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय हित से जुड़े मामलों में सभी दलों को निर्णय प्रक्रिया में शामिल करना देशहित के लिए जरूरी है।

शरद पवार की चिंता और अपील

शरद पवार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा कि हाल के वैश्विक हालात को देखते हुए प्रधानमंत्री द्वारा कुछ महत्वपूर्ण घोषणाएं की गई हैं, जिनका असर अर्थव्यवस्था पर गहरा हो सकता है। उनके अनुसार, इन फैसलों की अचानक घोषणा से आम जनता, व्यापारी वर्ग और निवेशकों के बीच अनिश्चितता और चिंता का माहौल पैदा हुआ है।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय हित से जुड़े ऐसे मामलों में सभी राजनीतिक दलों को विश्वास में लेकर निर्णय प्रक्रिया अपनाना बेहद जरूरी है। पवार ने प्रधानमंत्री से आग्रह किया कि इस संवेदनशील स्थिति को देखते हुए तुरंत सर्वदलीय बैठक बुलाई जाए।

विशेषज्ञों और उद्योग जगत की बैठक की मांग

पवार ने यह भी सुझाव दिया कि सरकार को देश के प्रमुख अर्थशास्त्रियों, उद्योग प्रतिनिधियों और विशेषज्ञों के साथ भी तत्काल बैठक करनी चाहिए। उनका मानना है कि इससे मौजूदा आर्थिक स्थिति का गहन विश्लेषण संभव होगा और भविष्य की नीतियों पर बेहतर रणनीति बनाई जा सकेगी।

प्रधानमंत्री की अपील और सुझाव

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में हैदराबाद के सिकंदराबाद परेड ग्राउंड में एक जनसभा के दौरान नागरिकों से अपील की थी कि वे अगले एक वर्ष तक सोने की खरीद में कमी करें, ताकि विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम किया जा सके। इसके अलावा उन्होंने ईंधन की खपत घटाने के लिए सार्वजनिक परिवहन जैसे मेट्रो के अधिक उपयोग का सुझाव भी दिया था।

प्रधानमंत्री ने कोविड-19 महामारी के दौरान अपनाए गए व्यवहारिक और अनुशासित उपायों को फिर से अपनाने की भी बात कही थी, जिससे संसाधनों की बचत और आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित की जा सके। इस पूरे घटनाक्रम ने राजनीतिक और आर्थिक दोनों ही स्तरों पर नई बहस को जन्म दे दिया है, जिसमें पारदर्शिता और व्यापक परामर्श की मांग प्रमुख रूप से सामने आ रही है।

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