भारत में नेपाल-बांग्लादेश जैसे हालात बनाने की तैयारी : अंडरकवर स्टिंग में चौंकाने वाले दावे, रोजाना 5 लाख खर्च का भी खुलासा

नोएडा। देश में सत्ता परिवर्तन यानी रिजीम चेंज को लेकर जारी बहस के बीच एक टीवी चैनल के अंडरकवर स्टिंग ऑपरेशन ने राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा तेज कर दी है। चैनल के ऑपरेशन रिजीम चेंज में अलग-अलग लोगों के साथ हुई कथित बातचीत के वीडियो सामने आए हैं। इनमें नेपाल और बांग्लादेश जैसे हालात, हिंसक प्रदर्शनों की संभावना, आंदोलन की रणनीति और प्रदर्शनकारियों के लिए संसाधनों की व्यवस्था जैसे मुद्दों पर बातचीत होने का दावा किया गया है।
मौलाना सिराज खान के बयान से चर्चा तेज
स्टिंग के दौरान मुंबई में जमीयत उलेमा-ए-हिंद के मुंबई प्रमुख मौलाना सिराज खान से फ्रांस जैसे हिंसक प्रदर्शनों की संभावना को लेकर सवाल किया गया। चैनल के मुताबिक, इस पर उन्होंने कहा, ष्मोमिन जिस दिन खड़ा होगा, किसी के संभाले संभलेगा नहीं।ष् उनके इस कथित बयान को लेकर बहस शुरू हो गई है।
नेपाल और बांग्लादेश जैसे हालात पर क्या बोले साफवान?
स्टिंग में मुस्लिम स्टूडेंट फेडरेशन से जुड़े साफवान कुड़क्कन से भी बातचीत दिखाई गई है। भारत में नेपाल और बांग्लादेश जैसी परिस्थितियां बनने की आशंका पर उन्होंने कथित तौर पर कहा कि कुछ न कुछ जरूर होगा और यदि 20 जुलाई जैसी स्थिति दोबारा बनी तो नेपाल जैसे हालात पैदा हो सकते हैं। आंदोलन की तैयारी को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि कुछ तो करना पड़ेगा।
प्रदर्शनों में महिलाओं की भूमिका पर भी बातचीत
स्टिंग में प्रदर्शन के दौरान महिलाओं को आगे रखने की कथित रणनीति पर भी सवाल किए गए। साफवान ने बातचीत में महिलाओं को आगे रखने और इससे पुलिस की छवि प्रभावित होने की बात कही। यह बयान भी चर्चा का विषय बना हुआ है।
रोजाना पांच लाख रुपये खर्च होने का दावा
क्रांतिकारी युवा संगठन के कन्वीनर भीम से प्रदर्शन में टेंट, पंखे, कूलर और अन्य सुविधाओं के इंतजाम पर सवाल किया गया। चैनल के अनुसार, उन्होंने कथित तौर पर बताया कि आंदोलन पर करीब पांच लाख रुपये प्रतिदिन खर्च हो रहे थे। वहीं, संगठन की प्रवक्ता मुदिता से बांग्लादेश जैसे आंदोलन को लेकर सवाल किए गए, जिस पर उन्होंने ऐसे आंदोलन की जरूरत से सहमति जताई।
स्टिंग के दावों पर उठे कई सवाल
इस पूरे मामले ने विरोध प्रदर्शनों की फंडिंग, संगठनात्मक तैयारी और लोकतांत्रिक आंदोलन की सीमाओं को लेकर बहस छेड़ दी है। हालांकि, स्टिंग में दिखाई गई बातचीत के आधार पर किसी व्यापक साजिश या संगठन की सामूहिक मंशा का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। पूरे वीडियो, संदर्भ और स्वतंत्र जांच के बाद ही इन दावों की वास्तविकता स्पष्ट हो सकेगी।
प्रफुल्ल तिवारी
एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।
