अमृत पर्व 2026 : हर-हर महादेव के जयघोष से गूंजा सोमनाथ, पीएम मोदी ने दिया भक्ति-विरासत का संदेश, कहा- जिसके नाम में ही सोम जुड़ा हो...

गिर सोमनाथ। गुजरात के ऐतिहासिक और आध्यात्मिक तीर्थ स्थल सोमनाथ मंदिर में आज एक दिव्य और भव्य दृश्य देखने को मिला। दरअसल प्रथम ज्योतिर्लिंग भगवान सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण के 75 साल पूरे होने पर सोमनाथ अमृत पर्व-2026 का आयोजन किया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी इस भव्य आयोजन के साक्षी बने।
प्रधानमंत्री मोदी सुबह हेलिपैड से मंदिर तक लगभग 1 किलोमीटर लंबे रोड शो में शामिल हुए, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने “हर-हर महादेव” के जयघोष के साथ उनका स्वागत किया। पूरा मार्ग ढोल, शंख और डमरू की ध्वनि से गूंज उठा, जिससे वातावरण पूर्णतः आध्यात्मिक हो गया। सोमनाथ अमृत पर्व को संबोधित करते हुए पीएम ने कहा, 75 साल पहले आज के ही दिन सोमनाथ मंदिर की पुनर्स्थापना... ये कोई साधारण अवसर नहीं था। अगर 1947 में भारत आजाद हुआ था तो, 1951 में सोमनाथ की प्राण प्रतिष्ठा ने भारत की स्वतंत्र चेतना का उद्घोष किया था।
पूजा-अर्चना और पवित्र कुंभाभिषेक
प्रधानमंत्री मोदी ने सोमनाथ महादेव के दर्शन कर विधिवत पूजा-अर्चना की और विशेष यज्ञ में आहुति भी दी। इसके बाद 11 पवित्र तीर्थ स्थलों से लाए गए जल से मंदिर का कुंभाभिषेक किया गया। इस अवसर पर वायुसेना की ‘सूर्य किरण’ टीम ने एयर शो प्रस्तुत किया, जबकि आकाश से पुष्पवर्षा ने पूरे कार्यक्रम को और भी भव्य बना दिया। पारंपरिक परिधान में सजी 100 कन्याओं ने ‘कलश नृत्य’ प्रस्तुत कर सभी का मन मोह लिया।
भक्ति और विरासत का संदेश
प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि भारत की आध्यात्मिक शक्ति ही विकसित भारत की नींव है। सोमनाथ का यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि भारत की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा और पुनर्जागरण की कहानी भी प्रस्तुत करता है।
जिसके नाम में ही सोम जुड़ा हो, उसे कौन नष्ट कर सकता है
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, जब मैं पिछली बार यहां आया था, तब मैंने कहा था कि जिसके नाम में ही सोम अर्थात अमृत जुड़ा हो, उसे कौन नष्ट कर सकता है। इतिहास के लंबे कालखंड में इस मंदिर ने अनेक आक्रमण झेले। महमूद गजनवी, अलाउद्दीन खिलजी जैसे अनेक आक्रांता आए। लुटेरों ने सोमनाथ मंदिर का वैभव मिटाने का प्रयास किया। वो सोमनाथ को एक भौतिक ढांचा मानकर उससे टकराते रहे। बार-बार इस मंदिर को तोड़ा गया। ये बार-बार बनता रहा। हर बार उठ खड़ा होता रहा! क्योंकि तोड़ने वालों को मालूम नहीं था कि हमारे राष्ट्र का वैचारिक सामर्थ्य क्या है। हम भौतिक शरीर को नश्वर मानने वाले लोग हैं। उसके भीतर बैठी आत्मा अविनाशी है। और शिव तो सर्वात्मा हैं।

पोखरण परमाणु परीक्षण को दिया गया था ऑपरेशन शक्ति नाम
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, देश ने पोखरण परमाणु परीक्षण को ऑपेरशन शक्ति नाम दिया था, क्योंकि, शिव के साथ शक्ति की आराधना ही हमारी परंपरा रही है। शिव और शक्ति की हमारी आराधना का जो विचार है, वो देश की वैज्ञानिक प्रगति के लिए भी प्रेरणा बने। आज हम ये संकल्प भी साकार होते देख रहे हैं। मैं इस अवसर पर भगवान सोमनाथ के चरणों से सभी देशवासियों को ऑपेरशन शक्ति की वर्षगांठ की भी बधाई देता हूं।
भारत की राजनीतिक इच्छाशक्ति अटल : पीएम मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, दुनियाभर की शक्तियां भारत को दबोचने के लिए मैदान में उतरी। अनेक प्रकार के बंधन लग गए। आर्थिक संभावनाओं के सारे रास्ते बंद कर दिए गए। 11 मई के बाद दुनिया हम पर टूट पड़ी थी। लेकिन 13 मई को फिर दो और परमाणु परीक्षण हुए थे। उससे दुनिया को पता चला था कि भारत की राजनीतिक इच्छाशक्ति कितनी अटल है। उस समय पूरी दुनिया का दबाव भारत पर था। लेकिन अटल जी के नेतृत्व में भाजपा सरकार ने दिखाया था कि हमारे लिए राष्ट्र प्रथम है। दुनिया की कोई ताकत भारत को झुका नहीं सकती, दबाव में नहीं ला सकती।
आज के ही दिन देश ने पोखरण में परमाणु परीक्षण किया गया रू पीएम मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, आज का दिन एक और वजह से भी विशेष है। 11 मई, 1998 यानी आज के ही दिन देश ने पोखरण में परमाणु परीक्षण किया था। देश ने 11 मई को पहले 3 परमाणु परीक्षण किए। हमारे वैज्ञानिकों ने भारत के सामर्थ्य को, भारत की क्षमता को दुनिया के सामने रखा। दुनिया में तूफान आ गया कि भारत कौन होता है, उसकी ये हैसियत, जो परमाणु परीक्षण करें।
सांस्कृतिक कार्यक्रम और जनसभा
पूरे मंदिर परिसर को विशेष रूप से सजाया गया था। ओडिशा के कलाकारों ने रेत कला के माध्यम से भगवान शिव और मंदिर की सुंदर आकृति प्रस्तुत की, जिसने श्रद्धालुओं का ध्यान आकर्षित किया। प्रधानमंत्री मोदी दोपहर में जनसभा को संबोधित करेंगे, जबकि शाम को वडोदरा में ‘सरदार धाम’ का लोकार्पण और रोड शो भी प्रस्तावित है।
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