महिला आरक्षण पर सियासी संग्राम : सोनिया ने केन्द्र पर साधा निशाना, कहा- परिसीमन है असली एजेंडा

नई दिल्ली। केन्द्र सरकार ने लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 फीसदी आरक्षण को लागू करने और डीलिमिटेशन (परिसीमन) के जरिए सीटों की संख्या बढ़ाने पर चर्चा के लिए 16 से 18 अप्रैल 2026 तक संसद का विशेष सत्र बुलाया है। इस सहमति बनाने के लिए केन्द्र सरकार सभी दलों से बात भी कर रही है। केन्द्र सरकार के इस कदम पर कांग्रेस की सीनियर नेता सोनिया गांधी ने तीखा हमला बोला है।
सोनिया ने कहा है कि संसद के विशेष सत्र का असली उद्देश्य महिला आरक्षण नहीं, बल्कि परिसीमन को आगे बढ़ाना है। उन्होंने इसे “खतरनाक” करार देते हुए चेतावनी दी कि यह प्रक्रिया संविधान के मूल ढांचे को प्रभावित कर सकती है। उन्होंने साफ कहा कि महिला आरक्षण अब कोई नया मुद्दा नहीं है। उन्होंने याद दिलाया कि 2023 में संसद द्वारा पारित नारी शक्ति वंदन अभियान के तहत लोकसभा और विधानसभा में महिलाओं को 33ः आरक्षण का प्रावधान पहले ही किया जा चुका है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब यह कानून पहले से मौजूद है, तो अब इसे अचानक प्राथमिकता देने के पीछे क्या मकसद है।
परिसीमन को बताया सबसे बड़ा खतरा
अपने लेख में उन्होंने कहा कि असली चिंता परिसीमन को लेकर है। उनका तर्क है कि यदि सीटों का पुनर्निर्धारण केवल जनसंख्या के आधार पर किया गया, तो इससे उन राज्यों को नुकसान होगा जिन्होंने जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन किया है। उन्होंने कहा कि यह कदम राजनीतिक संतुलन को बिगाड़ सकता है और कुछ राज्यों की प्रतिनिधित्व शक्ति को कम कर सकता है।
जातिगत जनगणना पर भी सरकार घिरी
सोनिया गांधी ने केंद्र सरकार पर जातिगत जनगणना को टालने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि जब ठपींत और ज्मसंदहंदं जैसे राज्य सीमित संसाधनों में सर्वे कर सकते हैं, तो केंद्र सरकार देरी क्यों कर रही है। उनके मुताबिक, सही आंकड़ों के बिना कोई भी परिसीमन निष्पक्ष नहीं हो सकता।
जनगणना में देरी पर उठाए सवाल
उन्होंने यह भी मुद्दा उठाया कि 2021 की जनगणना को टाल दिया गया, जिससे कई सरकारी योजनाओं का लाभ प्रभावित हुआ। अब 2027 में डिजिटल जनगणना की बात की जा रही है, लेकिन इतनी जल्दबाजी में परिसीमन लाना समझ से परे है।
बिना चर्चा के फैसला अलोकतांत्रिक
अंत में सोनिया गांधी ने कहा कि सरकार को इतने बड़े फैसले लेने से पहले विपक्ष से व्यापक चर्चा करनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार विपक्ष को भरोसे में लिए बिना एकतरफा निर्णय ले रही है, जो लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ है।
सियासत गरम, आगे क्या?
इस बयान के बाद राजनीतिक माहौल और गर्म हो गया है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि केंद्र सरकार इस पर क्या प्रतिक्रिया देती है और क्या विपक्ष की मांग पर कोई सर्वदलीय बैठक बुलाई जाती है या नहीं।
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