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ई-फाइलिंग से बदल रही देश की न्याय व्यवस्था : ई-कोर्ट्स से तीन गुना बढ़ी रफ्तार, 753 करोड़ पन्ने हुए ऑनलाइन

प्रफुल्ल तिवारी

प्रफुल्ल तिवारी

Aug 07, 2026
10:42 AM
ई-कोर्ट्स से तीन गुना बढ़ी रफ्तार, 753 करोड़ पन्ने हुए ऑनलाइन

नई दिल्ली। भारत की न्यायिक व्यवस्था तेजी से डिजिटल युग में प्रवेश कर रही है। केंद्र सरकार की ई-कोर्ट्स मिशन मोड परियोजना ने पारंपरिक कागजी व्यवस्था को आधुनिक, पारदर्शी और तकनीक आधारित प्रणाली में बदल दिया है। सरकार की ओर से जारी फैक्टशीट के अनुसार, वर्ष 2014 के बाद से मामलों की फाइलिंग और निपटान दोनों में लगभग तीन गुना वृद्धि दर्ज की गई है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अब अदालतें हर साल दर्ज होने वाले मामलों से अधिक मामलों का निपटारा कर रही हैं, जिससे लंबित मामलों का बोझ कम करने में मदद मिल रही है।

753 करोड़ पन्ने डिजिटाइज, करोड़ों लोगों को मिली राहत

फैक्टशीट के मुताबिक देशभर की अदालतों के 753 करोड़ से अधिक पन्नों का डिजिटलीकरण किया जा चुका है। इससे पुराने रिकॉर्ड सुरक्षित होने के साथ-साथ उन्हें ढूंढना और उनका उपयोग करना पहले की तुलना में कहीं अधिक आसान हो गया है। न्यायिक सेवाओं को आम नागरिकों तक पहुंचाने के लिए हजारों ई-सेवा केंद्र भी संचालित किए जा रहे हैं, जो डिजिटल सुविधाओं से वंचित लोगों के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

घर बैठे केस दाखिल करने की सुविधा

ई-कोर्ट्स परियोजना के तहत शुरू की गई ई-फाइलिंग व्यवस्था ने अदालतों में दस्तावेज जमा करने की प्रक्रिया पूरी तरह बदल दी है। अब वकील और पक्षकार किसी भी स्थान से ऑनलाइन केस दर्ज कर सकते हैं। यह प्रणाली अंग्रेजी के साथ-साथ कई क्षेत्रीय भाषाओं का भी समर्थन करती है। ऑनलाइन कोर्ट फीस जमा करने, वकालतनामा अपलोड करने और ई-साइन जैसी सुविधाओं ने पूरी प्रक्रिया को सरल और तेज बनाया है। 30 जून 2026 तक ई-फाइलिंग प्लेटफॉर्म के माध्यम से 1.25 करोड़ से अधिक मामलों की फाइलिंग की जा चुकी है, जबकि ई-पेमेंट के जरिए 1,404 करोड़ रुपये की कोर्ट फीस और 75 करोड़ रुपये से अधिक के जुर्माने का भुगतान ऑनलाइन किया गया।

वर्चुअल सुनवाई से समय और खर्च में कमी

डिजिटल न्याय व्यवस्था का सबसे बड़ा लाभ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के रूप में सामने आया है। अदालतों, जेलों और अस्पतालों सहित 7,553 स्थानों को इस सुविधा से जोड़ा गया है। अब तक देशभर की अदालतों में 4.18 करोड़ से अधिक मामलों की दूरस्थ सुनवाई हो चुकी है। इससे मुकदमेबाजों, वकीलों, गवाहों और पुलिस अधिकारियों का समय और यात्रा खर्च दोनों कम हुए हैं। इसके अलावा 11 हाईकोर्ट में अदालती कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग भी शुरू हो चुकी है, जिससे न्यायिक प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ी है।

एआई आधारित स्मार्ट अदालतों की ओर बढ़ता भारत

ई-कोर्ट्स परियोजना का तीसरा चरण वर्ष 2023 से 2027 तक चल रहा है। इस चरण में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), ऑप्टिकल कैरेक्टर रिकग्निशन (ओसीआर) और डेटा एनालिटिक्स जैसी आधुनिक तकनीकों को न्यायिक प्रणाली में शामिल किया जा रहा है। इसके साथ ही 'इंटर-ऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम' के तहत शुरू की गई 'न्याय श्रुति' सुविधा के माध्यम से आरोपी, गवाह, पुलिस अधिकारी, सरकारी वकील और विशेषज्ञ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से अदालत में पेश होकर गवाही दे सकते हैं। सरकार का मानना है कि इन तकनीकी सुधारों से न्यायिक प्रक्रिया और अधिक तेज, पारदर्शी, सुलभ तथा प्रभावी बनेगी।

प्रफुल्ल तिवारी
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प्रफुल्ल तिवारी

एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।

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