पन्ना के जंगलों में ड्रोन से बुझाई आग : देश में पहली बार हुआ ऐसा अभिनव प्रयोग, मोनो अमोनियम फॉस्फेट का छिड़काव कर आग पर पाया काबू

भोपाल। देश के वन प्रबंधन इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया है। दक्षिण पन्ना वनमंडल ने आधुनिक तकनीक का उपयोग करते हुए एरियल फायर फाइटिंग का प्रायोगिक परीक्षण किया। यह परीक्षण रविवार शाहनगर वन परिक्षेत्र में ड्रोन और फायर रिटार्डेंट (अग्नि रोधक) डीएफओ अनुपम शर्मा के अनुसार, यह परीक्षण राज्य वन अनुसंधान संस्थान के तकनीकी सहयोग से संपन्न हुआ।
प्रयोग के दौरान, ड्रोन के जरिए दुर्गम वन क्षेत्र में श्मोनो अमोनियम फॉस्फेट्य आधारित मिश्रण का नियंत्रित छिड़काव किया गया। यह रसायन आग की तीव्रता को कम करने और उसे फैलने से रोकने में बेहद प्रभावी माना जाता है। ड्रोन तकनीक के उपयोग से दुर्गम क्षेत्रों में आग पर त्वरित पहुंच बनाना और शुरुआती स्तर पर ही उस पर काबू पाना सरल हो जाएगा। इससे वन कर्मचारियों को भीषण लपटों के सीधे संपर्क में आने से भी बचाया जा सकेगा।
गेम चेजर साबित होगा प्रयास
पन्ना वनमंडल का यह कदम न केवल वनों को बचाने की दिशा में एक आधुनिक पहल है, बल्कि यह वन प्रबंधन में श्स्मार्ट तकनीक्य के उपयोग के लिए पूरे देश के सामने एक मॉडल भी प्रस्तुत कर सकता है। यदि यह तकनीक वैज्ञानिक और पर्यावरणीय दृष्टि से सफल साबित होती है, तो भविष्य में संवेदनशील वन्यजीव आवासों और भीषण वनाग्नि की स्थितियों में यह एक गेम-चेंजर साबित होगी।
सुनिश्चित होगी कर्मचारियों की सुरक्षा
भीषण गर्मी के दौरान अक्सर दुर्गम पहाडियों और घने जंगलों में आग लग जाती है। ऐसे क्षेत्रों में वन कर्मचारियों का समय पर पहुंचना और जान जोखिम में डालकर आग बुझाना एक बड़ी चुनौती होती है। वर्तमान में आग बुझाने के लिए श्फायर बीटिंग्य और श्लीफ ब्लोअर्य जैसे पारंपरिक तरीकों का उपयोग किया जाता है।
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