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खसरा नंबर 596 पर होगी जुमे की नमाज : धार भोजशाला विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का आदेश, 1.3 किमी दूर भेजने पर अदालत ने जताई आपत्ति

प्रफुल्ल तिवारी

प्रफुल्ल तिवारी

Jul 30, 2026
10:45 AM
धार भोजशाला विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का आदेश, 1.3 किमी दूर भेजने पर अदालत ने जताई आपत्ति

नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के बहुचर्चित धार भोजशाला विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को अहम फैसला सुनाते हुए जिला प्रशासन को निर्देश दिया कि मुस्लिम समुदाय को जुमे की नमाज दोपहर 1 बजे से 3 बजे के बीच खसरा नंबर 596 स्थित दरगाह भूमि पर अदा करने की अनुमति दी जाए। अदालत ने माना कि यह जमीन विवादित परिसर से सटी हुई है और नमाज के लिए उपयुक्त स्थान है। इस आदेश के साथ ही प्रशासन की ओर से तय की गई करीब 1.3 किलोमीटर दूर की वैकल्पिक जगह पर नमाज पढ़ने की व्यवस्था फिलहाल समाप्त हो गई है।

कोर्ट ने कहा- सहमति से बदली जा सकती है व्यवस्था

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने स्पष्ट किया कि यह आदेश वर्तमान परिस्थितियों को ध्यान में रखकर दिया गया है। यदि भविष्य में हिंदू और मुस्लिम पक्ष आपसी सहमति से किसी अन्य वैकल्पिक स्थान पर सहमत होते हैं, तो इस आदेश को बाधा नहीं माना जाएगा। अदालत ने दोनों समुदायों के बीच संवाद और सहमति की संभावना भी खुली रखी।

मुस्लिम पक्ष ने प्रशासन पर आदेश उल्लंघन का लगाया आरोप

मुस्लिम पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता हुजैफा अहमदी ने अदालत में दलील दी कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही निर्देश दे चुका था कि नमाज के लिए विवादित परिसर के अंदर या उसके बिल्कुल पास कोई खुली जगह उपलब्ध कराई जाए। साथ ही हिंदू श्रद्धालुओं के लिए अलग प्रवेश और निकास की व्यवस्था करने को भी कहा गया था ताकि पूजा-अर्चना प्रभावित न हो।

अहमदी ने आरोप लगाया कि जिला प्रशासन ने इन निर्देशों का पालन नहीं किया और नमाज के लिए परिसर से 1.3 किलोमीटर से अधिक दूर स्थान आवंटित कर दिया, जो व्यावहारिक रूप से उचित नहीं है। उन्होंने यह भी बताया कि मुस्लिम पक्ष ने वक्फ बोर्ड की चार खाली जमीनों का प्रस्ताव दिया था, लेकिन प्रशासन ने सभी विकल्पों को सुरक्षा कारणों का हवाला देकर खारिज कर दिया।

2003 की व्यवस्था बहाल करने की भी उठी मांग

सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्ष ने वर्ष 2003 से लागू उस व्यवस्था को बहाल करने की मांग भी रखी, जिसके तहत मंगलवार को हिंदू समुदाय भोजशाला में पूजा करता था, जबकि शुक्रवार को मुस्लिम समुदाय जुमे की नमाज अदा करता था। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि नए आदेशों के बाद हिंदू पक्ष को पूजा की सुविधा मिल रही है, लेकिन मुस्लिम पक्ष को अब तक न्यायालय के निर्देशानुसार उपयुक्त स्थान उपलब्ध नहीं कराया गया।

नक्शा देखकर कोर्ट ने दिया फैसला

सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने पूरे विवादित क्षेत्र का आधिकारिक साइट प्लान मांगा। इसके बाद मुस्लिम पक्ष ने जिला प्रशासन द्वारा तैयार नक्शा और गूगल मैप के जरिए अदालत को बताया कि दरगाह के पास पर्याप्त खाली जमीन उपलब्ध है, जहां कानून-व्यवस्था बनाए रखते हुए नमाज कराई जा सकती है।

वहीं, भोजशाला समिति ने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा कि भोजशाला भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा संरक्षित ऐतिहासिक स्मारक है और उसके समीप नमाज की अनुमति देने से सुरक्षा और धार्मिक संवेदनशीलता प्रभावित हो सकती है। हालांकि, दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने प्रशासन को निर्देश दिया कि जुमे की नमाज के लिए भोजशाला परिसर से सटी खसरा नंबर 596 की जमीन उपलब्ध कराई जाए। इससे लंबे समय से चल रहे स्थान संबंधी विवाद पर फिलहाल न्यायिक स्पष्टता मिल गई है।

प्रफुल्ल तिवारी
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प्रफुल्ल तिवारी

एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।

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