अलविदा नाना पाटेकर : 'अग्निसाक्षी' में निभाया किरदार आज भी लोगों के जेहन में जिंदा, अभिनय का हर कोई दीवाना

मुंबई। हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का 8 अक्टूबर को 75 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उनके निधन की खबर से फिल्म जगत में शोक की लहर दौड़ गई। अभिनय की अनोखी शैली, दमदार संवाद अदायगी और हर किरदार में जान डाल देने की क्षमता ने उन्हें दर्शकों के बीच अलग पहचान दिलाई। अभिनेता के निधन के बाद फिल्म जगत से जुड़े लोगों और प्रशंसकों ने उनसे जुड़ी यादें साझा कीं।
अभिनेता ही नहीं, लेखक और निर्देशक भी थे
नाना पाटेकर का जन्म 1 जनवरी 1951 को मुंबई में हुआ था। उन्होंने वर्ष 1978 में फिल्म ‘गमन’ से हिंदी सिनेमा में कदम रखा। इसके बाद उन्होंने मराठी फिल्मों में भी काम किया। वर्ष 1989 में आई ‘परिंदा’ से उन्हें व्यापक पहचान मिली, जिसमें उन्होंने खलनायक की भूमिका निभाई।
नाना पाटेकर ने अभिनय के साथ लेखन, निर्माण और निर्देशन में भी अपनी प्रतिभा दिखाई। वर्ष 1994 में उन्होंने ‘प्रहार: द फाइनल अटैक’ से निर्देशन की शुरुआत की।
हर किरदार में छोड़ी अमिट छाप
नाना पाटेकर ने सकारात्मक, नकारात्मक, गंभीर और हास्य भूमिकाओं में अपनी अलग छाप छोड़ी। ‘अग्निसाक्षी’ में उनके अभिनय को खूब सराहा गया और उन्हें सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला। ‘अंगार’ में खलनायक की भूमिका के लिए उन्हें पुरस्कार मिला।
वर्ष 1993 की ‘तिरंगा’ में पुलिस अधिकारी शिवाजीराव वाघले का किरदार आज भी दर्शकों के बीच लोकप्रिय है। वहीं ‘क्रांतिवीर’ में प्रताप नारायण तिलक की भूमिका ने उन्हें नई ऊंचाई दी। इस फिल्म के लिए उन्हें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
‘वेलकम’ से ‘नटसम्राट’ तक यादगार सफर
नाना पाटेकर ने ‘खामोशी: द म्यूजिकल’, ‘शक्ति: द पावर’, ‘वेलकम’, ‘राजनीति’, ‘अपहरण’ और ‘नटसम्राट’ जैसी फिल्मों में यादगार अभिनय किया। वर्ष 2005 की ‘अपहरण’ में उनके नकारात्मक किरदार को भी खूब सराहना मिली।
‘नटसम्राट’ में उनके दमदार अभिनय के लिए उन्हें मराठी फिल्म पुरस्कार मिला। फिल्मों और कला के प्रति उनके योगदान को देखते हुए उन्हें पद्मश्री से भी सम्मानित किया गया। नाना पाटेकर अपने पीछे अभिनय की ऐसी विरासत छोड़ गए हैं, जिसे लंबे समय तक याद किया जाएगा।
प्रफुल्ल तिवारी
एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।
