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कौन चला रहा पुनर्वास केंद्र, कैसे हो रही निगरानी : सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से पंजीकरण से निगरानी तक मांगा जवाब

admin

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Oct 08, 2026
01:51 PM
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से पंजीकरण से निगरानी तक मांगा जवाब

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने दिव्यांग बच्चों के लिए संचालित पुनर्वास केंद्रों और ऐसी अन्य संस्थाओं की व्यवस्था को लेकर केंद्र सरकार से राज्यवार विस्तृत जानकारी जुटाने को कहा है। अदालत ने केंद्र को इन संस्थाओं के पंजीकरण, नियमन और निगरानी से जुड़ा पूरा ब्योरा रिकॉर्ड पर रखने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 22 अक्टूबर को होगी।

सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से जुटानी होगी जानकारी

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने दिव्यांगों और बच्चों के अधिकारों से जुड़े वकीलों राहुल बजाज और जहीर अब्बास जान की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिया। पीठ में न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना शामिल थे। अदालत ने केंद्र सरकार से कहा कि वह सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ समन्वय कर यह जानकारी जुटाए कि दिव्यांग बच्चों के पुनर्वास से जुड़ी संस्थाओं पर लागू कानूनी सुरक्षा उपायों को किस स्तर तक लागू किया गया है।

हलफनामे में देना होगा पूरा ब्योरा

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से हलफनामे के जरिए दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के तहत गठित वैधानिक प्राधिकरणों की स्थिति और उनके कामकाज की जानकारी देने को कहा है। इसके साथ ही मानसिक स्वास्थ्य संस्थानों के लिए तय न्यूनतम मानकों, उनकी अधिसूचना और पुनर्वास केंद्रों के निरीक्षण एवं निगरानी की व्यवस्था का विवरण भी मांगा गया है। अदालत यह जानना चाहती है कि राज्यों में संबंधित संस्थाओं के नियमन और निगरानी के लिए बनाए गए तंत्र वास्तव में किस तरह काम कर रहे हैं।

पुनर्वास केंद्रों के पंजीकरण का मुद्दा

सुनवाई के दौरान राहुल बजाज ने कहा कि दिव्यांगजनों के लिए काम करने वाले पुनर्वास केंद्रों का दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम के तहत राज्य स्तर पर पंजीकरण जरूरी है। उन्होंने कहा कि यह पता लगाने के लिए ठोस राज्यवार आंकड़ों की जरूरत है कि सभी राज्यों में जरूरी वैधानिक प्राधिकरण बनाए गए हैं या नहीं और वे अपने नियामकीय दायित्वों का पालन कर रहे हैं या नहीं। उन्होंने मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम, 2017 का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, अब तक केवल 10 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने मानसिक स्वास्थ्य केंद्रों के लिए आवश्यक न्यूनतम मानकों की अधिसूचना जारी की है।

22 अक्टूबर को फिर होगी सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासन के साथ समन्वय कर आवश्यक जानकारी जुटाने और उसे अदालत के समक्ष पेश करने का निर्देश दिया है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 22 अक्टूबर को होगी। अदालत के निर्देश के बाद राज्यों में दिव्यांग बच्चों के पुनर्वास केंद्रों की पंजीकरण व्यवस्था, मानकों और निगरानी तंत्र से जुड़ी स्थिति का विस्तृत ब्योरा सामने आने की उम्मीद है।

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एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।

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