UCC लागू करने की दिशा में बढ़ा मप्र : पूर्व जस्टिस की अध्यक्षता में आहूत हुई पहली बैठक, इन मुद्दोंपर हुआ प्रारंभिक मंथन

भोपाल। मध्यप्रदेश में यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) लागू करने की दिशा में सरकार ने औपचारिक प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस उद्देश्य से गठित 6 सदस्यीय विशेषज्ञ समिति की पहली बैठक दिल्ली स्थित मध्यप्रदेश भवन में आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई ने की। बैठक में राज्य की सामाजिक संरचना, सांस्कृतिक विविधता और कानूनी पहलुओं पर प्रारंभिक चर्चा की गई।
बैठक में विशेष रूप से उत्तराखंड और गुजरात में लागू किए गए यूसीसी मॉडलों का अध्ययन किया गया। समिति के सदस्यों ने इन राज्यों में लागू प्रावधानों, उनके प्रभाव और व्यावहारिक चुनौतियों पर विचार-विमर्श किया। साथ ही यह भी तय किया गया कि मध्यप्रदेश की सामाजिक और सांस्कृतिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए ही ड्राफ्ट तैयार किया जाएगा। समिति का मानना है कि किसी भी समान नागरिक संहिता को तैयार करते समय स्थानीय परंपराओं और विविध समुदायों की आवश्यकताओं को समझना बेहद जरूरी है।
आदिवासी समाज की परंपराओं पर रहेगा विशेष ध्यान
बैठक में आदिवासी समुदाय की परंपराओं, रीति-रिवाजों और उनके पारंपरिक कानूनों पर विशेष जोर दिया गया। समिति ने स्पष्ट किया कि आदिवासी क्षेत्रों की सामाजिक व्यवस्था और सांस्कृतिक पहचान को ध्यान में रखकर ही किसी भी प्रस्ताव को अंतिम रूप दिया जाएगा। इसके लिए विशेषज्ञों की राय और स्थानीय स्तर पर अध्ययन भी किया जाएगा।
जनसुनवाई और लोगों से सीधा संवाद करेगी समिति
कमेटी जल्द ही प्रदेश के विभिन्न जिलों में जनसुनवाई और परामर्श बैठकों की शुरुआत करेगी। इन बैठकों के माध्यम से आम नागरिकों, सामाजिक संगठनों और विभिन्न समुदायों से सुझाव लिए जाएंगे। प्राप्त सुझावों के आधार पर न्ब्ब् का प्रारंभिक मसौदा तैयार किया जाएगा। अनुमान है कि यह प्रक्रिया मई के अंत तक शुरू हो सकती है।
कार्यालय और प्रशासनिक व्यवस्था भी होगी मजबूत
समिति के सुचारू संचालन के लिए दिल्ली स्थित मध्यप्रदेश भवन और भोपाल स्थित वल्लभ भवन में अलग-अलग कार्यालय स्थापित किए जाएंगे। इन कार्यालयों के माध्यम से समन्वय, दस्तावेजीकरण और जनसंपर्क से जुड़े कार्य किए जाएंगे।
इस महत्वपूर्ण बैठक में पूर्व आईएएस अधिकारी शत्रुघ्न सिंह, उत्तराखंड के पूर्व मुख्य सचिव अनूप नायर और वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल कृष्ण शर्मा भी उपस्थित रहे। मध्यप्रदेश सरकार का यह कदम राज्य में समान नागरिक संहिता की दिशा में एक अहम शुरुआत माना जा रहा है, जिसकी आगे की प्रक्रिया अब जनभागीदारी और व्यापक विचार-विमर्श पर आधारित होगी।
admin
एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।
