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दिन में हों विवाह जैसे पवित्र संस्कार : देवकीनंदन ठाकुर की राय, मद्यपान, मंदिर प्रबंधन और दान राशि विवाद पर भी बोले कथावाचक

प्रफुल्ल तिवारी

प्रफुल्ल तिवारी

Jun 16, 2026
05:55 AM
देवकीनंदन ठाकुर की राय, मद्यपान, मंदिर प्रबंधन और दान राशि विवाद पर भी बोले कथावाचक

भोपाल। प्रसिद्ध कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर ने विवाह संस्कारों, मंदिरों के संचालन और धार्मिक संस्थाओं में पारदर्शिता जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर खुलकर अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि भारतीय परंपरा और शास्त्रों के अनुसार विवाह जैसे पवित्र संस्कारों का आयोजन दिन के समय होना चाहिए, जबकि रात में होने वाली शादियों की प्रथा ऐतिहासिक परिस्थितियों की देन है।

उन्होंने कहा कि सनातन परंपरा में गोधूलि बेला को विवाह के लिए सबसे शुभ समय माना गया है। प्राचीन काल में विवाह संबंधी सभी प्रमुख धार्मिक अनुष्ठान दिन में ही संपन्न किए जाते थे। हालांकि, विदेशी आक्रमणों और सामाजिक असुरक्षा के दौर में लोगों ने अपनी बेटियों की सुरक्षा के लिए रात में विवाह करना शुरू किया, जो बाद में एक सामान्य परंपरा बन गई। ठाकुर ने कहा कि वर्तमान समय में ऐसी परिस्थितियां नहीं हैं, इसलिए समाज को पुनः अपनी मूल परंपराओं की ओर लौटने पर विचार करना चाहिए।

हिन्दू धर्म के सोलह संस्कारों में से एक विवाह संस्कार

शादियों में बढ़ते मद्यपान के चलन पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि विवाह हिंदू धर्म के सोलह संस्कारों में से एक महत्वपूर्ण संस्कार है। ऐसे पवित्र अवसरों पर नशे का सेवन संस्कारों की गरिमा को प्रभावित करता है। उनका मानना है कि विवाह समारोहों को जितना अधिक सात्विक और मर्यादित रखा जाएगा, उतना ही सकारात्मक प्रभाव परिवार और समाज पर पड़ेगा।

मंदिर की संपत्ति और दान राशि को माना गया पवित्र

राम मंदिर दान पात्र से जुड़े विवाद पर बोलते हुए देवकीनंदन ठाकुर ने धार्मिक ग्रंथों का उल्लेख करते हुए कहा कि मंदिर की संपत्ति और दान राशि को अत्यंत पवित्र माना गया है। उन्होंने कहा कि धार्मिक संस्थाओं के धन का दुरुपयोग गंभीर नैतिक और आध्यात्मिक अपराध है तथा इससे समाज में गलत संदेश जाता है।

मंदिरों में सरकारी हस्तक्षेप का विरोध

मंदिरों के प्रशासन में सरकारी हस्तक्षेप का विरोध करते हुए उन्होंने स्वतंत्र सनातन बोर्ड के गठन की मांग दोहराई। उनके अनुसार मंदिरों और धार्मिक संस्थानों का संचालन धर्मशास्त्रों की गहरी समझ रखने वाले विद्वानों और धर्माचार्यों के हाथों में होना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि इस बोर्ड का नेतृत्व चार प्रमुख शंकराचार्यों में से किसी एक को सौंपा जाए।

न्यायिक प्रक्रिया पर भी की टिप्पणी

न्यायिक प्रक्रिया पर टिप्पणी करते हुए ठाकुर ने कहा कि कई मामलों में जांच और सुनवाई की प्रक्रिया इतनी लंबी हो जाती है कि निर्णय आने में वर्षों लग जाते हैं। उन्होंने धार्मिक संस्थाओं से जुड़े मामलों में त्वरित कार्रवाई और जवाबदेही सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर बल देते हुए दोषियों के खिलाफ शीघ्र निर्णय की वकालत की।

प्रफुल्ल तिवारी
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प्रफुल्ल तिवारी

एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।

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