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श्रावण की तृतीया पर भक्तिमय हुआ महाकाल दरबार : भस्म आरती में उमड़ा आस्था का सैलाब, विशेष श्रृंगार ने मोहा श्रद्धालुओं का मन

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Aug 01, 2026
05:00 AM
भस्म आरती में उमड़ा आस्था का सैलाब, विशेष श्रृंगार ने मोहा श्रद्धालुओं का मन

उज्जैन। श्रावण कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि पर शनिवार तड़के विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में आयोजित भस्म आरती के दौरान आस्था का अद्भुत नजारा देखने को मिला। देर रात से ही हजारों श्रद्धालु बाबा महाकाल के दर्शन के लिए कतारों में खड़े रहे। सुबह तीन बजे मंदिर के पट खुलते ही पूरा परिसर "जय श्री महाकाल" के जयघोष से गूंज उठा और भक्तों ने बाबा के दिव्य स्वरूप के दर्शन कर खुद को धन्य माना।

मंदिर के पुजारी पंडित महेश शर्मा के अनुसार, भस्म आरती से पहले परंपरा के अनुसार वीरभद्र जी से आज्ञा लेकर गर्भगृह के पट खोले गए। इसके बाद मंदिर में स्थापित सभी देव प्रतिमाओं का विधि-विधान से पूजन किया गया। भगवान महाकाल का जल, दूध, दही, घी, शक्कर, पंचामृत और फलों के रस से अभिषेक किया गया। प्रथम घंटा बजाकर 'हरि ओम' का जल अर्पित किया गया और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विशेष पूजा संपन्न हुई।

भांग के विशेष श्रृंगार ने मोहा श्रद्धालुओं का मन

पूजन के बाद बाबा महाकाल का मनमोहक श्रृंगार किया गया। कपूर आरती के उपरांत उन्हें नवीन मुकुट धारण कराया गया। इस बार के श्रृंगार की सबसे बड़ी विशेषता भांग से किया गया अलौकिक श्रृंगार रहा, जिसमें बाबा के मस्तक पर शिवलिंग की सुंदर आकृति बनाई गई। इसके साथ ही मखाने की आकर्षक माला पहनाकर भगवान को विशेष रूप से सजाया गया। इस दिव्य स्वरूप के दर्शन कर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे।

भस्म अर्पण के साथ संपन्न हुई दिव्य आरती

महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से शिवलिंग पर पवित्र भस्म अर्पित की गई। इसके बाद झांझ, मंजीरे, ढोल-नगाड़ों और शंखनाद की गूंज के बीच भस्म आरती संपन्न हुई। धार्मिक मान्यता है कि भस्म अर्पण के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। इसी आस्था के कारण प्रतिदिन देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु इस अद्भुत आरती में शामिल होने उज्जैन पहुंचते हैं।

महाकाल मंदिर की आरतियों का समय

श्री महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती सुबह 3 से 6 बजे, दद्योदक आरती सुबह 7 से 7:45 बजे, भोग आरती सुबह 10 से 10:45 बजे, संध्या पूजन शाम 5 से 5:45 बजे, संध्या आरती शाम 7 से 7:45 बजे और शयन आरती रात 10:30 से 11 बजे तक होती है। मंदिर प्रशासन के अनुसार आरतियों का यह संशोधित समय आश्विन मास की पूर्णिमा (शरद पूर्णिमा) तक प्रभावी रहेगा।

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