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किश्तवाड़ में आतंकी नेटवर्क पर बड़ा प्रहार : सैफुल्लाह ग्रुप से जुड़े दो ओवरग्राउंड वर्कर आए शिकंजे में, पुलिस के एक्शन से आतंकियों को मदद पहुंचाने का भंडाफोड़

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May 13, 2026
10:20 AM
सैफुल्लाह ग्रुप से जुड़े दो ओवरग्राउंड वर्कर आए शिकंजे में, पुलिस के एक्शन से आतंकियों को मदद पहुंचाने का भंडाफोड़

किश्तवाड। जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में सुरक्षा बलों ने आतंकवाद के खिलाफ एक बड़ी सफलता हासिल की है। पुलिस ने सैफुल्लाह ग्रुप से जुड़े दो कथित ओवरग्राउंड वर्करों (ओजीडब्ल्यूएस) को गिरफ्तार किया है, जो विदेशी आतंकियों को रसद, ठिकाने और अन्य सहायता उपलब्ध कराने में शामिल बताए जा रहे हैं। यह कार्रवाई सिंहपोरा-चतरू क्षेत्र में चलाए गए एक विशेष ऑपरेशन के दौरान की गई।

पुलिस ने इस मामले में एफआईआर नंबर 03-2026 दर्ज की है और आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), यूएपीए (यूएपीए) और आर्म्स एक्ट के तहत गंभीर धाराएं लगाई गई हैं। सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि यह गिरफ्तारी एक बड़े आतंकी सहयोगी नेटवर्क को कमजोर करने की दिशा में अहम कदम है।

शिक्षक की भूमिका पर सवाल, लॉजिस्टिक सपोर्ट देने का आरोप

गिरफ्तार आरोपियों में एक की पहचान मशकूर अहमद के रूप में हुई है, जो सिंहपोरा क्षेत्र के बेघपोरा गांव का निवासी है और शिक्षा विभाग में शिक्षक के पद पर कार्यरत था। पुलिस के अनुसार, मशकूर लंबे समय से आतंकियों के संपर्क में था और उन्हें सुरक्षित ठिकाने उपलब्ध कराने, संसाधन पहुंचाने और स्थानीय स्तर पर सहायता देने में सक्रिय भूमिका निभा रहा था।

पुलिस का दावा है कि उसकी गतिविधियों से आतंकियों को मिलने वाला लॉजिस्टिक सपोर्ट नेटवर्क मजबूत हो रहा था, जिसे अब इस गिरफ्तारी के बाद गंभीर झटका लगा है।

पहले भी हुई गिरफ्तारी, पूरे मॉड्यूल की जांच जारी

इस मामले में पहले ही मनीर अहमद नाम के एक अन्य आरोपी को गिरफ्तार किया जा चुका है, जो बांदेयान नैडगाम क्षेत्र का निवासी है। उस पर भी विदेशी आतंकियों को सहायता देने और सुरक्षित आश्रय उपलब्ध कराने के आरोप हैं। दोनों आरोपियों से पूछताछ के आधार पर पुलिस अब पूरे नेटवर्क और उसके अन्य सहयोगियों की पहचान करने में जुटी है। जांच एजेंसियों को उम्मीद है कि इस पूछताछ से आतंकी मॉड्यूल की पूरी संरचना सामने आ सकती है।

पुलिस की जीरो टॉलरेंस नीति, अभियान जारी रहेगा

जम्मू-कश्मीर पुलिस ने स्पष्ट किया है कि आतंकवाद और उसके सहयोगियों के खिलाफ उनकी नीति पूरी तरह “जीरो टॉलरेंस” की है। अधिकारियों ने कहा कि जो भी व्यक्ति आतंकियों को किसी भी प्रकार की मदद देगा, उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। सुरक्षा बलों ने क्षेत्र में सर्च ऑपरेशन और निगरानी बढ़ा दी है ताकि किसी भी संभावित आतंकी गतिविधि को समय रहते रोका जा सके। पुलिस ने स्थानीय लोगों से भी अपील की है कि वे किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत सुरक्षा एजेंसियों को दें।

शांति और सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता

प्रशासन ने दोहराया है कि जम्मू-कश्मीर में शांति, सुरक्षा और कानून व्यवस्था बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है। अधिकारियों का कहना है कि आतंकी नेटवर्क को पूरी तरह समाप्त करने के लिए अभियान लगातार जारी रहेगा और किसी भी स्तर पर ढिलाई नहीं बरती जाएगी।

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