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सीबीएसई मूल्यांकन प्रक्रिया विवाद : केन्द्रीय शिक्षा मंत्री ने संभाला मोर्चा, अधिकारियों के साथ की हाईलेवल मीटिंग, तकनीकी समस्याओं पर हुई चर्चा

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May 28, 2026
06:44 AM
केन्द्रीय शिक्षा मंत्री ने संभाला मोर्चा, अधिकारियों के साथ की हाईलेवल मीटिंग, तकनीकी समस्याओं पर हुई चर्चा

नई दिल्ली। सीबीएसई कक्षा 12 परीक्षा परिणामों और मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर उठे विवाद के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने सीबीएसई मुख्यालय में वरिष्ठ अधिकारियों के साथ अहम समीक्षा बैठक की। बैठक में छात्रों को पुनर्मूल्यांकन, वेरिफिकेशन और भुगतान प्रक्रिया के दौरान आ रही तकनीकी परेशानियों पर विस्तार से चर्चा की गई। मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि छात्रों की समस्याओं का जल्द समाधान सुनिश्चित किया जाए ताकि उन्हें किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।

17 लाख छात्रों की कॉपियों का हुआ मूल्यांकन

बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में धर्मेंद्र प्रधान ने बताया कि इस वर्ष सीबीएसई कक्षा 12 की परीक्षा में लगभग 17 लाख छात्र शामिल हुए थे। इन छात्रों की करीब 98 लाख उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन किया गया। इसके तहत लगभग 40 करोड़ स्कैन किए गए पन्नों की जांच की गई, जो अपने आप में एक बड़ा रिकॉर्ड माना जा रहा है। उन्होंने कहा कि इतनी विशाल प्रक्रिया को पारदर्शी और सटीक बनाने के लिए आधुनिक तकनीक का उपयोग किया गया है।

पहली बार लागू हुई डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली

शिक्षा मंत्री ने बताया कि इस बार पहली बार सीबीएसई ने डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली यानी ऑन-स्क्रीन मार्किंग लागू की है। इस नई व्यवस्था का उद्देश्य परीक्षा मूल्यांकन प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाना और छात्रों को अधिक सुविधा प्रदान करना है। अब परीक्षक डिजिटल माध्यम से उत्तर पुस्तिकाओं की जांच कर रहे हैं, जिससे मानवीय त्रुटियों की संभावना कम हुई है।

छात्र देख सकेंगे अपनी स्कैन कॉपियां

धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि नई व्यवस्था के तहत छात्र अपनी स्कैन की गई उत्तर पुस्तिकाएं ऑनलाइन देख सकते हैं। इसके अलावा वे अपने प्राप्त अंकों की जांच कर सकते हैं और किसी भी प्रकार की त्रुटि होने पर आपत्ति भी दर्ज करा सकते हैं। मंत्री के अनुसार अब तक करीब 4 लाख छात्र अपनी उत्तर पुस्तिकाएं एक्सेस कर चुके हैं, जिनमें लगभग 11 लाख कॉपियां शामिल हैं।

पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम

शिक्षा मंत्रालय का मानना है कि डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली छात्रों के विश्वास को मजबूत करेगी और भविष्य में परीक्षा प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी तथा छात्र-केंद्रित बनाएगी। हालांकि, तकनीकी दिक्कतों को लेकर छात्रों की शिकायतों के बाद सीबीएसई अब व्यवस्था को और बेहतर बनाने पर काम कर रहा है।

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