जज सास गिरफ्तार! : ट्विशा मौत केस में सीबीआई का बड़ा एक्शन, हाईकोर्ट के फैसले के 24 घंटे में दबिश

भोपाल। राजधानी भोपाल के बहुचर्चित ट्विशा शर्मा हत्या मामले में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। केन्द्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) लंबी पूछताछ के बाद ट्विशा शर्मा की सास और पूर्व जज गिरिबाला सिंह को हिरासत में ले लिया है। सीबीआई की टीम ने सुबह उनके भोपाल के कटारा हिल्स स्थित घर पहुंचकर घंटों पूछताछ करने के बाद गिरिबाला सिंह को हिरासत में लिया। इस दौरान भारी संख्या में पुलिस बल भी तैना रहा। पूरे इलाके में बैरिकेडिंग कर आम लोगों की आवाजाही रोक दी गई, जिससे इलाके में हड़कंप मच गया।
यह कार्रवाई मध्यप्रदेश हाईकोर्ट द्वारा एक दिन पहले गिरिबाला सिंह की अग्रिम जमानत रद्द किए जाने के बाद हुई। हाईकोर्ट ने अपने सख्त रुख में साफ कहा कि मामले में गंभीर आरोप हैं और उनकी निष्पक्ष जांच जरूरी है।
शादी के पांच महीने बाद मौत, शरीर पर मिले कई चोटों के निशान
ट्विशा शर्मा की 12 मई को भोपाल स्थित ससुराल में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। उनकी शादी 9 दिसंबर 2025 को समर्थ सिंह से हुई थी। शुरुआती जांच में मामला आत्महत्या का बताया गया, लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट और परिवार के आरोपों ने पूरे केस को नया मोड़ दे दिया।
अदालत में पेश रिपोर्ट के मुताबिक त्विषा के शरीर पर फांसी के अलावा छह से सात अन्य चोटों के निशान मिले थे। इनमें हाथ, उंगली और सिर की चोटें शामिल थीं। बाद की मेडिकल रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट हुआ कि ये चोटें शव उतारने या अस्पताल ले जाने के दौरान नहीं लगी थीं।
सिर्फ पति तक सीमित नहीं आरोप, हाई कोर्ट की सख्त टिप्पणी
न्यायमूर्ति देवनारायण मिश्रा की एकलपीठ ने 17 पन्नों के आदेश में कहा कि निचली अदालत ने महत्वपूर्ण तथ्यों पर पर्याप्त विचार नहीं किया। कोर्ट ने माना कि व्हाट्सएप चैट, मृतका के परिजनों के बयान और परिस्थितिजन्य साक्ष्य यह संकेत देते हैं कि आरोप केवल पति समर्थ सिंह तक सीमित नहीं हैं।
हाईकोर्ट ने यह भी माना कि त्विषा के गर्भपात का तथ्य स्वीकार किया जा चुका है और परिवार ने आरोप लगाया है कि उसे गर्भपात के लिए दबाव बनाया गया था। कोर्ट ने दहेज प्रताड़ना और क्रूरता के आरोपों की गहन जांच को जरूरी बताया।
“क्राइम सीन से छेड़छाड़” का भी आरोप
त्विषा के पिता के वकील ने अदालत में दावा किया कि गिरिबाला ैपदही साइबर फॉरेंसिक और क्राइम सीन मैनेजमेंट में प्रशिक्षित पूर्व न्यायिक अधिकारी हैं। ऐसे में उन्होंने अपने अनुभव का इस्तेमाल कर घटनास्थल से छेड़छाड़ की हो सकती है।
मध्यप्रदेश के महाधिवक्ता प्रशांत सिंह ने भी अदालत में कहा कि गिरिबाला सिंह ने जांच में सहयोग नहीं किया। कोर्ट ने इन तथ्यों को गंभीर मानते हुए अग्रिम जमानत रद्द कर दी, जिसके बाद सीबीआई ने तेज कार्रवाई करते हुए उन्हें हिरासत में ले लिया।
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