डिजिटल भुगतान में भारत की ऐतिहासिक उड़ान : जुलाई में रिकार्ड स्तर पर पहुंचा यूपीआई का उपयोग, 23.66 अरब ट्रांजैक्शन के साथ बढ़ी वैश्विक ताकत

नई दिल्ली। भारत में डिजिटल भुगतान व्यवस्था लगातार नई ऊंचाइयों को छू रही है। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, जुलाई 2026 में यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) के माध्यम से 23.66 अरब (बिलियन) ट्रांजैक्शन दर्ज किए गए। यह पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 22 प्रतिशत अधिक है। वहीं इन लेनदेन का कुल मूल्य भी 19 प्रतिशत बढ़कर 29.88 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया। ये आंकड़े बताते हैं कि देश में डिजिटल भुगतान अब आम लोगों की दिनचर्या का अहम हिस्सा बन चुका है।
हर दिन 76 करोड़ से ज्यादा डिजिटल लेनदेन
एनपीसीआई के अनुसार, जुलाई महीने में प्रतिदिन औसतन 76.3 करोड़ यूपीआई ट्रांजैक्शन हुए। दैनिक आधार पर लेनदेन का औसत मूल्य 96,383 करोड़ रुपये रहा। यह दर्शाता है कि छोटे भुगतान से लेकर बड़े वित्तीय लेनदेन तक यूपीआई पर लोगों का भरोसा लगातार बढ़ रहा है। जून 2026 में 22.72 अरब ट्रांजैक्शन हुए थे, जिनका कुल मूल्य 28.92 लाख करोड़ रुपये था। जुलाई में ट्रांजैक्शन की संख्या और कुल मूल्य दोनों में और बढ़ोतरी दर्ज की गई।
पांच वर्षों में कई गुना बढ़ा डिजिटल भुगतान
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक पिछले पांच वित्त वर्षों में यूपीआई ने अभूतपूर्व विस्तार किया है। वित्त वर्ष 2021-22 में 4,595.61 करोड़ ट्रांजैक्शन दर्ज हुए थे, जिनका कुल मूल्य 84.16 लाख करोड़ रुपये था। वित्त वर्ष 2022-23 में यह संख्या बढ़कर 8,371.44 करोड़ हो गई। इसके बाद 2023-24 में 13,112.95 करोड़ और 2024-25 में 18,586.60 करोड़ ट्रांजैक्शन दर्ज किए गए। इसी अवधि में कुल लेनदेन मूल्य भी लगातार बढ़ता गया, जो डिजिटल अर्थव्यवस्था की मजबूत होती तस्वीर पेश करता है।
दुनिया में भी बढ़ रहा भारत के यूपीआई का दायरा
केंद्र सरकार का कहना है कि यूपीआई अब केवल भारत तक सीमित नहीं है। वित्त राज्य मंत्री पंकज चैधरी ने लोकसभा में जानकारी दी थी कि एनपीसीआई इंटरनेशनल पेमेंट्स लिमिटेड (एनआईपीएल) विभिन्न देशों के साथ साझेदारी कर भारतीय डिजिटल भुगतान प्रणाली का वैश्विक विस्तार कर रही है। इससे भारतीय पर्यटकों और विदेशों में रहने वाले भारतीयों को सीमा पार भी आसानी से डिजिटल भुगतान की सुविधा मिल रही है।
आठ से अधिक देशों में पहुंचा भारतीय भुगतान मॉडल
वर्तमान में यूपीआई संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), सिंगापुर, फ्रांस, मॉरीशस और श्रीलंका सहित आठ से अधिक देशों में उपलब्ध है। इसके अलावा साझेदार देशों को यूपीआई जैसी रियल-टाइम भुगतान प्रणाली और रुपे कार्ड नेटवर्क विकसित करने में भी भारत सहयोग दे रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यूपीआई की लगातार बढ़ती स्वीकार्यता भारत को वैश्विक फिनटेक क्षेत्र में अग्रणी देशों की श्रेणी में मजबूत स्थान दिला रही है और आने वाले वर्षों में इसका दायरा और तेजी से बढ़ने की संभावना है।
प्रफुल्ल तिवारी
एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।
