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स्वामित्व योजना : मप्र में 1.60 लाख रजिस्ट्रियां पूरी, छिंदवाड़ा सबसे आगे, रीवा दूसरे और सागर तीसरे स्थान पर

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Oct 21, 2026
02:44 PM
मप्र में 1.60 लाख रजिस्ट्रियां पूरी, छिंदवाड़ा सबसे आगे, रीवा दूसरे और सागर तीसरे स्थान पर

भोपाल। मध्यप्रदेश में ग्रामीणों को उनकी संपत्ति का कानूनी अधिकार दिलाने के लिए संचालित स्वामित्व योजना के तहत अब तक 1 लाख 60 हजार 230 रजिस्ट्रियां पूरी हो चुकी हैं। प्रदेश के सभी 55 जिलों में ग्रामीण आबादी क्षेत्र के मकानों और भूखंडों के स्वामित्व संबंधी वैधानिक दस्तावेज तैयार कर पात्र हितग्राहियों को उपलब्ध कराए जा रहे हैं। योजना से ग्रामीणों को अपनी संपत्ति पर अधिकार का प्रमाण मिलने के साथ ही आर्थिक गतिविधियों के लिए बैंक ऋण जैसी वित्तीय सुविधाएं प्राप्त करने का आधार भी मजबूत हो रहा है। रजिस्ट्रियों के मामले में छिंदवाड़ा जिला प्रदेश में पहले स्थान पर है, जबकि रीवा दूसरे और सागर तीसरे स्थान पर है।

छिंदवाड़ा में सबसे अधिक 8530 रजिस्ट्रियां

स्वामित्व योजना के तहत जिलों में पंजीयन की प्रगति अलग-अलग है। छिंदवाड़ा में सर्वाधिक 8530 रजिस्ट्रियां पूरी हुई हैं। इसके बाद रीवा में 7563, सागर में 7289, राजगढ़ में 6285, छतरपुर में 6128, नरसिंहपुर में 6042, सतना में 5620, शिवपुरी में 5131, विदिशा में 4850, सिवनी में 4736, जबलपुर में 4269 और ग्वालियर में 3925 रजिस्ट्रियां दर्ज की गई हैं। बैतूल में 3864, मंदसौर में 3831, मंडला में 3636, नर्मदापुरम में 3624, सीहोर में 3534, रायसेन में 3159, कटनी में 2971, बालाघाट में 2913, गुना में 2883, नीमच में 2786, धार में 2777, उज्जैन में 2725 और मैहर में 2634 रजिस्ट्रियां पूरी हुई हैं।

भोपाल में 967, इंदौर में 883 रजिस्ट्रियां

डिंडोरी में 2534, मुरैना में 2521, खंडवा में 2370, श्योपुर में 2354, बड़वानी में 2339, टीकमगढ़ में 2321, हरदा में 2237, शाजापुर में 2012, देवास में 1987, दमोह में 1873, खरगोन में 1843 और आगर-मालवा में 1755 रजिस्ट्रियां दर्ज की गई हैं।

वहीं, सीधी में 1738, दतिया में 1608, भिंड में 1561, झाबुआ में 1538, निवाड़ी में 1493, बुरहानपुर में 1308, पन्ना में 1278, शहडोल में 1257, रतलाम में 1122, भोपाल में 967, उमरिया में 903, इंदौर में 883, अनूपपुर में 853, आलीराजपुर में 786, मऊगंज में 689 और पांढुर्णा में 666 रजिस्ट्रियां पूरी हो चुकी हैं।

ड्रोन सर्वे से तैयार हो रहे संपत्ति के अभिलेख

योजना के तहत ग्रामीण आबादी क्षेत्रों में मकानों और भूखंडों का आधुनिक ड्रोन तकनीक से सर्वेक्षण किया जाता है। इसके आधार पर संपत्ति के अभिलेख तैयार कर पात्र हितग्राहियों को स्वामित्व संबंधी दस्तावेज दिए जाते हैं। इससे संपत्ति के मालिकाना हक को लेकर स्पष्टता आती है और भविष्य में विवादों की आशंका कम करने में मदद मिलती है।

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