शुरू हो चुकी है भविष्य की जंग : एयर मार्शल का बड़ा बयान, ऑपरेशन सिंदूर में दिखी भारत की वर्षो पुरानी तैयारी

नई दिल्ली। ऑपरेशन सिंदूर ने दुनिया को भारतीय वायुसेना की बढ़ती ताकत और स्वदेशी तकनीक की क्षमता का अहसास कराया है। एक चर्चा के दौरान एयर मार्शल (सेवानिवृत्त) जितेंद्र मिश्र ने कहा कि भविष्य का युद्ध कोई दूर की बात नहीं है, बल्कि उसकी तैयारी आज ही चल रही है। उनके मुताबिक ऑपरेशन सिंदूर में दिखाई दी सैन्य क्षमता अचानक तैयार नहीं हुई, बल्कि वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और वायुसेना की कई पीढ़ियों की वर्षों की मेहनत का परिणाम है।
पश्चिमी वायु कमान के पूर्व एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ रहे मिश्र ने बताया कि आधुनिक युद्ध में तकनीक सबसे निर्णायक भूमिका निभा रही है। उन्होंने ब्रह्मोस एयर लॉन्च क्रूज मिसाइल का उदाहरण देते हुए कहा कि सुखोई-30 से दागी जाने वाली यह मिसाइल सैकड़ों किलोमीटर दूर लक्ष्य पर बेहद सटीक प्रहार करने में सक्षम है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता के तेजी से बढ़ते प्रभाव के बीच उन्होंने चेताया कि तकनीकी बदलाव की रफ्तार से कदम मिलाना अब जरूरी हो गया है।
15 साल की मेहनत से तैयार हुआ वायु रक्षा तंत्र
मिश्र के अनुसार भारत की वायु रक्षा क्षमता मजबूत करने में सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक एकीकृत वायु कमान एवं नियंत्रण प्रणाली है। करीब 15 साल की मेहनत के बाद तैयार इस स्वदेशी तंत्र में सैन्य और नागरिक रडारों को एक नेटवर्क से जोड़ा गया है। इससे देश के अलग-अलग हिस्सों में मौजूद हवाई गतिविधियों पर एक साथ नजर रखी जा सकती है और जरूरत पड़ने पर तेजी से कार्रवाई की जा सकती है।
उन्होंने बताया कि पहले हर रडार के पास अलग-अलग कर्मचारी बैठकर निगरानी करते थे, लेकिन अब विभिन्न स्रोतों से मिलने वाला आंकड़ा एक साझा प्रणाली में पहुंचता है। यह बदलाव भारत की तकनीकी क्षमता और रणनीतिक आत्मनिर्भरता का बड़ा उदाहरण है।
बालाकोट से सिंदूर तक बदली जवाबी कार्रवाई की रणनीति
एयर मार्शल ने बालाकोट और ऑपरेशन सिंदूर की तुलना करते हुए कहा कि भारत के पास पहले भी हमला करने की क्षमता थी, लेकिन समय के साथ रणनीतिक फैसलों ने जवाबी कार्रवाई का दायरा बढ़ाया है। उड़ी के बाद बालाकोट और फिर सिंदूर ने यह संदेश दिया कि हर हमले का जवाब परिस्थितियों के अनुसार और अधिक प्रभावी तरीके से दिया जा सकता है।
उन्होंने सटीक हमलों का जिक्र करते हुए कहा कि उपग्रह तस्वीरों और जमीनी परिणामों से भारतीय कार्रवाई की प्रभावशीलता स्पष्ट हुई। उनके मुताबिक सैनिकों को अपने किए गए काम और उसके परिणाम की पूरी जानकारी होती है।
स्वदेशी तकनीक ही असली संप्रभुता
मिश्र ने स्वदेशीकरण को केवल ‘मेक इन इंडिया’ तक सीमित मानने से इनकार किया। उन्होंने कहा कि युद्ध के समय यदि किसी महत्वपूर्ण हथियार या उपकरण के लिए दूसरे देश पर निर्भर रहना पड़े तो स्वतंत्र निर्णय लेने की क्षमता प्रभावित होती है। इसलिए महत्वपूर्ण तकनीकों, कलपुर्जों और प्रणालियों पर देश की पकड़ जरूरी है।
ड्रोन को भविष्य की युद्ध व्यवस्था का अहम हिस्सा बताते हुए उन्होंने कहा कि ये मानवयुक्त लड़ाकू विमानों का पूरी तरह विकल्प नहीं हैं, लेकिन जोखिम वाले अभियानों और बड़े पैमाने पर निगरानी में इनकी भूमिका तेजी से बढ़ेगी।
एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र का संदेश साफ थाकृआसमान की सुरक्षा केवल लड़ाकू विमानों से नहीं, बल्कि रडार, मिसाइल, आंकड़ा नेटवर्क, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और स्वदेशी तकनीक के मजबूत मेल से होती है।
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