गणेश चतुर्थी 2026 : बप्पा को घर लाने में हुई देर ता न हो परेशान, दोपहर से शाम तक इन शुभ मुहूर्तों में करें गणेश पूजन

गणेश चतुर्थी का पर्व आज देशभर में उल्लासपूर्वक मनाया जा रहा है। भक्त विघ्नहर्ता की भक्ति में पहले ही दिन से डूबे नजर आ रहे हैं। घरों से लेकर पंडालों तक लंबोदर के स्वागत की भव्य तैयारियां पूरी हो चुकी हैं और भक्त शुभ मुहूर्त में गणेश प्रतिमा की स्थापना की तैयारियों में जुटे हुए हैं। लेकिन सुबह के मुख्य स्थापना मुहूर्त में पूजा नहीं कर पाए हैं, तो परेशान होने की जरूरत नहीं है। मध्याह्न काल के अलावा भी तीन शुभ चैघड़िया मुहूर्त बन रहे हैं। ऐसे में दोपहर 1 बजे के बाद भी शुभ समय में गणपति की स्थापना की जा सकती है।
1ः49 बजे से शुरू होगा चर चैघड़िया
सुबह का मुख्य मुहूर्त निकल जाने के बाद गणपति स्थापना का पहला शुभ अवसर चर चैघड़िया में मिलेगा। यह समय दोपहर 1रू49 बजे से 3रू22 बजे तक रहेगा। अगर किसी कारण से सुबह गणपति की प्रतिमा घर नहीं ला पाए हैं, तो इस अवधि में बप्पा को घर लाकर विधि-विधान से स्थापित किया जा सकता है।
3ः22 से 4ः55 बजे तक लाभ मुहूर्त
इसके बाद लाभ चैघड़िया शुरू होगा, जो दोपहर 3रू22 बजे से शाम 4रू55 बजे तक रहेगा। इस अवधि को भी शुभ माना जाता है। पूजा में देरी न हो, इसके लिए चैकी, आसन, कलश और पूजा सामग्री पहले से तैयार रखना बेहतर रहेगा।
शाम 4ः55 से 6ः28 बजे तक अमृत चैघड़िया
गणपति स्थापना का तीसरा विकल्प अमृत चैघड़िया है। यह समय शाम 4रू55 बजे से 6रू28 बजे तक रहेगा। यानी अगर दिन में किसी वजह से स्थापना नहीं हो पाई, तो शाम के इस शुभ समय में भी गणपति बप्पा की स्थापना की जा सकती है।
मध्याह्न काल क्यों माना जाता है विशेष?
गणेश चतुर्थी पर गणपति स्थापना के लिए मध्याह्न काल को विशेष महत्व दिया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान गणेश का प्राकट्य भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी के मध्याह्न काल में हुआ था। इसलिए इस अवधि में पूजा और स्थापना को विशेष शुभ माना जाता है। हालांकि, मुख्य मुहूर्त निकल जाने पर शुभ चैघड़िया में भी स्थापना की जा सकती है।
स्थापना से पहले इन बातों का रखें ध्यान
गणपति स्थापना से पहले घर और पूजा स्थल की अच्छी तरह सफाई करें। चैकी पर साफ कपड़ा बिछाकर गणपति की प्रतिमा स्थापित करें। इसके बाद दीप जलाएं और भगवान गणेश को रोली, अक्षत, फूल और दूर्वा अर्पित करें। गणपति बप्पा को मोदक या अपनी पसंद की मिठाई का भोग लगाएं और विधि-विधान से आरती करें।
अंत में परिवार की सुख-समृद्धि, शांति और विघ्नों के नाश की कामना करते हुए गणपति बप्पा से आशीर्वाद लें।
admin
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