हिजाब विवाद पर मायावती का हमला: : बसपा प्रमुख बोलीं - धार्मिक मान्यताओं और महिलाओं के सम्मान से जुड़े मामलों में बरतें संवेदनशीलता

लखनऊ। प्रयागराज के एक स्कूल में हिजाब को लेकर चल रहे विवाद पर बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X के जरिए अपनी प्रतिक्रिया दी है। इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा 11वीं कक्षा की मुस्लिम छात्रा की हिजाब पहनने की अनुमति संबंधी याचिका खारिज किए जाने के बाद मायावती ने कहा कि बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर द्वारा दिए गए सेक्युलर संविधान के तहत सभी नागरिकों को अपनी धार्मिक मान्यताओं का अधिकार है।
मायावती ने कहा कि स्कूलों में यूनिफॉर्म, पर्दा, चादर या हिजाब जैसे संवेदनशील मुद्दों को सीधे कोर्ट-कचहरी तक ले जाने के बजाय स्थानीय स्तर पर स्कूल प्रबंधन और शासन-प्रशासन को आपसी समझ और संवाद के जरिए समाधान निकालना चाहिए। उनका कहना है कि ऐसे मामलों को जरूरत से ज्यादा तूल देने से सामाजिक माहौल प्रभावित हो सकता है।
हाईकोर्ट ने खारिज की छात्रा की याचिका
इलाहाबाद हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने प्रयागराज स्थित टैगोर पब्लिक स्कूल की छात्रा की याचिका खारिज कर दी। न्यायमूर्ति जे.जे. मुनीर और न्यायमूर्ति इंद्रजीत शुक्ला की पीठ ने कहा कि हिजाब पहनना इस्लाम धर्म का अनिवार्य हिस्सा साबित नहीं हुआ है। अदालत ने स्कूल के ड्रेस कोड को एकरूपता, गैर-भेदभाव और अनुशासन बनाए रखने की व्यवस्था माना।
छात्रा की ओर से यह भी तर्क दिया गया था कि वह कक्षा 6 से 10 तक हिजाब पहनकर स्कूल आती रही है। इस पर अदालत ने स्पष्ट किया कि पहले मिली अनुमति से किसी छात्र को भविष्य में ऐसा करने का कानूनी अधिकार हासिल नहीं हो जाता।
महिलाओं के सम्मान का मुद्दा उठाया
मायावती ने महिलाओं की अस्मिता, सम्मान और पर्दे के माध्यम से आत्म-सम्मान की रक्षा जैसे मुद्दों को संवेदनशीलता से देखने की बात कही। उन्होंने सभी पक्षों से ऐसे मामलों पर अनावश्यक टिप्पणी से बचने की अपील की। साथ ही कहा कि संवेदनशील मुद्दों को राजनीतिक रंग देने से बचना चाहिए, ताकि किसी को संकीर्ण राजनीति करने का अवसर न मिले।
बदायूं विवाद पर भी जताई चिंता
बसपा प्रमुख ने बदायूं में डॉ. आंबेडकर की प्रतिमा स्थापित करने को लेकर चल रहे विवाद का भी जिक्र किया। उन्होंने शासन-प्रशासन से मामले का तत्काल शांतिपूर्ण और उचित समाधान निकालने की मांग की, ताकि क्षेत्र में तनाव न बढ़े और कानून-व्यवस्था कायम रहे। मायावती की प्रतिक्रिया ऐसे समय आई है, जब हिजाब, स्कूल ड्रेस कोड और धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर कानूनी और सामाजिक बहस फिर चर्चा में है।
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