छग विधानसभा मानूसन सत्रः : सदन में गूंजेगा नकटी भूमि विवाद का मसला, किसान-कानून व्यवस्था समेत इन मुद्दों पर सरकार को घेरेगा विपक्ष

रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा का मानसून सत्र इस बार काफी हंगामेदार रहने के संकेत दे रहा है। 13 जुलाई से 17 जुलाई तक चलने वाले पांच दिवसीय सत्र में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी राजनीतिक भिड़ंत देखने को मिल सकती है। कांग्रेस ने कानून-व्यवस्था, किसानों की समस्याएं, खाद-बीज संकट, शिक्षा व्यवस्था, नकटी भूमि विवाद, बिजली-पानी और बाढ़ जैसे जनसरोकारों से जुड़े कई मुद्दों पर साय सरकार को घेरने की रणनीति तैयार कर ली है। वहीं सरकार भी विपक्ष के हर सवाल का जवाब देने के लिए पूरी तैयारी में जुटी हुई है।
बारिश, बाढ़ और कानून-व्यवस्था पर सरकार से होंगे सवाल
प्रदेश में मानसून सक्रिय है और कई जिलों में भारी बारिश के चलते जलभराव और बाढ़ जैसे हालात बने हुए हैं। ऐसे में विपक्ष आपदा प्रबंधन की तैयारियों, राहत कार्यों और प्रशासनिक व्यवस्थाओं को लेकर सरकार को कटघरे में खड़ा कर सकता है। इसके साथ ही प्रदेश की कानून-व्यवस्था भी विपक्ष के निशाने पर रहेगी। कांग्रेस का आरोप है कि प्रदेश में अपराधों की घटनाएं बढ़ी हैं और सरकार कानून-व्यवस्था संभालने में नाकाम रही है।
किसानों की समस्याएं बनेंगी बड़ा मुद्दा
मानसून सत्र में किसानों से जुड़े मुद्दे सबसे प्रमुख रहने की संभावना है। कांग्रेस खाद और बीज की कमी, सिंचाई व्यवस्था, बिजली आपूर्ति, मौसम की मार झेल रहे किसानों को मुआवजा, धान खरीदी की तैयारियों और कृषि क्षेत्र से जुड़ी अन्य समस्याओं को लेकर सरकार को घेरने की तैयारी में है। विपक्ष का कहना है कि खेती-किसानी से जुड़े कई मुद्दों पर सरकार अब तक प्रभावी समाधान नहीं दे सकी है।
नकटी भूमि विवाद की गूंज विधानसभा तक
रायपुर के नकटी गांव का भूमि विवाद भी इस बार विधानसभा में गूंज सकता है। अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई, विस्थापन और विधायक आवास के लिए प्रस्तावित भूमि को लेकर चल रहा विवाद अब राजनीतिक रंग ले चुका है। खास बात यह है कि इस मामले में भाजपा के ही एक सांसद द्वारा सवाल उठाए जाने के बाद मामला और गर्मा गया है। कांग्रेस इसे सरकार की कार्यप्रणाली और प्रशासनिक फैसलों पर सवाल उठाने का बड़ा मुद्दा बनाने की तैयारी में है।
बिजली, पानी और बदहाल सड़कें भी विपक्ष के एजेंडे में
जनता से जुड़े बुनियादी मुद्दों को लेकर भी विपक्ष सरकार पर हमलावर रहेगा। ग्रामीण क्षेत्रों में लगातार हो रही बिजली कटौती, पेयजल संकट, जर्जर सड़कें, मानसून के दौरान बाढ़ और जलभराव की स्थिति तथा आपदा प्रबंधन की तैयारियों को लेकर विपक्ष सरकार से जवाब मांगेगा। माना जा रहा है कि इन मुद्दों पर सदन में तीखी बहस देखने को मिल सकती है।
शिक्षा व्यवस्था पर भी सरकार की होगी परीक्षा
सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की कमी, शिक्षकों के हजारों रिक्त पद, विद्यार्थियों की समस्याएं और निजी स्कूलों की बढ़ती फीस जैसे मुद्दे भी विधानसभा में गूंजेंगे। कांग्रेस का कहना है कि शिक्षा व्यवस्था में लगातार सामने आ रही खामियों पर सरकार को जवाब देना होगा। विपक्ष इन मुद्दों को उठाकर शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग करेगा।
सत्र से पहले सरकार ने भी बनाई रणनीति
जहां विपक्ष सरकार को घेरने की तैयारी में है, वहीं साय सरकार भी किसी तरह की चूक नहीं चाहती। विधानसभा सत्र से पहले मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कैबिनेट की अहम बैठक बुलाकर विभागवार तैयारियों की समीक्षा की। मंत्रियों को विपक्ष के संभावित सवालों का तथ्यात्मक जवाब देने और सदन को सुचारु रूप से चलाने की रणनीति पर चर्चा की गई।
देर रात बैठकों ने बढ़ाई सियासी हलचल
इस बार का मानसून सत्र इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि पिछले कुछ सप्ताह में सरकार की लगातार बैठकों ने राजनीतिक चर्चाओं को हवा दी है। कुछ समय पहले मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अपने सरकारी आवास पर देर रात कैबिनेट की विशेष बैठक बुलाई थी, जो रात करीब दो बजे तक चली। हालांकि बैठक के एजेंडे का आधिकारिक खुलासा नहीं किया गया। उपमुख्यमंत्री ने इसे राज्य के विकास और बेहतर प्रशासन से जुड़ी सामान्य बैठक बताया, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इस बैठक को लेकर कई तरह की चर्चाएं होती रहीं।
इसके बाद हुई लगातार कैबिनेट बैठकों ने भी राजनीतिक अटकलों को और तेज कर दिया। माना जा रहा है कि सरकार विधानसभा सत्र के दौरान विपक्ष के हर सवाल का मजबूती से जवाब देने के लिए पहले से ही रणनीति तैयार कर चुकी है।
सियासी संग्राम के पूरे आसार
13 जुलाई से शुरू होने वाला विधानसभा का मानसून सत्र केवल विधायी कार्यवाही तक सीमित नहीं रहने वाला। यह सत्र सरकार की कार्यशैली, विपक्ष की आक्रामकता और प्रदेश के जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों पर राजनीतिक दिशा तय करने वाला साबित हो सकता है। सत्ता और विपक्ष दोनों ने अपनी-अपनी रणनीति तैयार कर ली है। ऐसे में सदन के भीतर तीखी बहस, जोरदार हंगामे और बड़े राजनीतिक टकराव के पूरे आसार हैं।
नीलम अहिरवार
17 साल से टीवी और डिजिटल की दुनिया में सक्रिय। एंटरटेनमेंट, करंट अफेयर्स और पब्लिक कनेक्ट खबरों की धुरंधर। बॉलीवुड की हरकतों को दुनिया तक पहुंचाने में खास दिलचस्पी।
