पावर कट के दौर से पावर सरप्लस तक : सीएम ने 25 सालों की गिनाई उपलब्धियां, ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोसिएशन कॉन्फ्रेंस में चुनौतियों पर भी मंथन

भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंगलवार को भोपाल में अक्षय ऊर्जा और ऊर्जा भंडारण की किफायती दरों पर खरीद को लेकर आयोजित ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोसिएशन कॉन्फ्रेंस का शुभारंभ किया। सम्मेलन में देशभर की 50 से अधिक विद्युत वितरण कंपनियों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। बैठक में अक्षय ऊर्जा और ऊर्जा भंडारण की किफायती खरीद के साथ बिजली कंपनियों के सामने आ रही चुनौतियों और उनके समाधान पर चर्चा की गई।
सम्मेलन को संबोधित करते हुए सीएम ने कहा कि मध्यप्रदेश ने बिजली कटौती का लंबा दौर देखा है, लेकिन अब राज्य बिजली की कमी से निकलकर ऊर्जा अधिशेष राज्य बन चुका है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश के बनने से लेकर साल 2002-2003 तक प्रदेश की बिजली उत्पादन क्षमता करीब 5 हजार मेगावाट थी, लेकिन अब यह बढ़कर 32 हजार मेगावाट हो गई है। इसमें करीब 30 प्रतिशत हिस्सेदारी हरित ऊर्जा की है। उन्होंने कहा कि पारंपरिक बिजली स्रोतों के साथ पवन, सौर और जल भंडारण आधारित बिजली उत्पादन को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।

नीमच-मंदसौर में बड़ी परियोजना
डॉ. यादव ने बताया कि नीमच-मंदसौर में हरित ऊर्जा क्षेत्र की एक कंपनी ने दो हजार मेगावाट क्षमता की परियोजना स्थापित की है। उन्होंने इसे देश की बड़ी ऊर्जा परियोजनाओं में शामिल बताया। मुख्यमंत्री के अनुसार, आमतौर पर इतनी बड़ी परियोजना को पूरा होने में चार से छह वर्ष लगते हैं, जबकि मध्यप्रदेश में इसे करीब ढाई वर्ष में पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है।
सस्ती बिजली उपलब्ध कराने पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार प्रदेशवासियों को सस्ती दरों पर बिजली उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। बिजली की बढ़ती खपत को देखते हुए उत्पादन क्षमता बढ़ाने के साथ बिजली व्यवस्था के रखरखाव पर भी ध्यान दिया जा रहा है। नई तकनीक के इस्तेमाल से बिजली उत्पादन की नई इकाइयां शुरू की जा रही हैं।
प्रफुल्ल तिवारी
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