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नक्सलियों पर कार्रवाई रोकती रही वोट बैंक की राजनीति, : मानवाधिकार के मंच से सीएम मोहन का कांग्रेस पर हमला, देश को गुलाम रखने वालों का महिमामंडन किया

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Sep 13, 2026
12:49 PM
मानवाधिकार के मंच से सीएम मोहन का कांग्रेस पर  हमला, देश को गुलाम रखने वालों का महिमामंडन किया

भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शनिवार को मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग के 32वें स्थापना दिवस समारोह में शामिल हुए। कार्यक्रम आरसीवीपी नरोन्हा प्रशासन एवं प्रबंधकीय अकादमी में आयोजित किया गया। सीएम ने कार्यक्रम में आयोग की स्मारिका, डायरी और न्यूज लेटर का विमोचन किया। कार्यक्रम में जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह, मप्र राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष रामलाल रौतेल और आयोग के अध्यक्ष एपी सिंह मौजूद रहे।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सीएम डॉ. यादव ने कांग्रेस को अपने निशाने पर लिया। मुख्यमंत्री ने मानवाधिकार के मुद्दे पर कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि मानवाधिकार का वास्तविक अर्थ हर व्यक्ति को समान अवसर, सम्मान और सुरक्षित जीवन उपलब्ध कराना है। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि कांग्रेस शासनकाल में ऐसे लोगों को भी महिमामंडित किया गया, जिन्होंने देश को गुलाम बनाकर रखा था। यहां तक कि उनके नाम पर मार्गों के नाम रखे गए। उन्होंने नक्सलवाद का जिक्र करते हुए कहा कि वोट की राजनीति के कारण कई बार नक्सलियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई, जिसका खामियाजा समाज को भुगतना पड़ा।

कांग्रेस के पुराने शानस पर खड़े किए सवाल

इस दौरान सीएम ने कांग्रेस के पुराने शासन और नक्सलवाद की राजनीति पर सवाल खड़े किए। सीएम कहा कि मानवाधिकार की आड़ में राजनीतिक स्वार्थ साधना स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस के शासनकाल में देश को गुलाम बनाने वालों तक को सम्मान दिया गया और उनके नाम पर मार्गों के नाम रखे गए। नक्सलवाद को लेकर भी उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि वोट बैंक की राजनीति के चलते कई बार नक्सलियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई से परहेज किया गया, जिसका नुकसान समाज और देश को उठाना पड़ा।

मानवाधिकार के नाम पर वोट की राजनीति पर निशाना

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मानवाधिकार केवल किसी एक वर्ग या व्यक्ति के अधिकार तक सीमित नहीं है। समाज के प्रत्येक व्यक्ति को समान अवसर और सम्मान मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि कई बार राजनीतिक स्वार्थों के कारण मानवाधिकार की परिभाषा को अपने हिसाब से इस्तेमाल किया गया। नक्सलवाद का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि वोट की राजनीति के चलते नक्सलियों के खिलाफ समय पर कार्रवाई नहीं की गई और इससे समाज के सामने गंभीर चुनौतियां खड़ी हुईं।

मोदी के कोविड प्रयासों का किया उल्लेख

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कोविड काल के प्रयासों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत ने महामारी के दौरान न केवल अपने नागरिकों की जान बचाने का प्रयास किया, बल्कि दुनिया के कई देशों को दवाएं उपलब्ध कराईं। उनके अनुसार, यह 'जीयो और जीने दोÓ के अधिकार को स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम था।

सनातन संस्कृति में मानवता का भाव

डॉ. यादव ने कहा कि जीयो और जीने दो की भावना भारत की सनातन संस्कृति में आदिकाल से मौजूद रही है। उन्होंने वेद वाक्य यत् पिंडे तत् ब्रह्मांडे का उल्लेख करते हुए कहा कि जैसा हमारे शरीर में है, वैसा ही ब्रह्मांड में है। जो मुझमें है, वही दूसरे में भी है। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति ने केवल मनुष्य ही नहीं, बल्कि संपूर्ण प्रकृति के प्रति भी इसी भाव को अपनाया है।

हर व्यक्ति को समान अवसर देने का संकल्प

मुख्यमंत्री ने कहा कि मानव जीवन 84 लाख योनियों के बाद प्राप्त होता है और इसका महत्व समझना जरूरी है। मध्यप्रदेश सरकार इसी भावना के साथ प्रत्येक व्यक्ति को समान अवसर और सम्मान देने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि समाज में अधिकारों के साथ कर्तव्यों और जिम्मेदारियों की भावना भी मजबूत होनी चाहिए।

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एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।

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