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ग्रीन एनर्जी में मप्र की बड़ी छलांगः : दिल्ली में सीएम बोले- 12 साल में 25 गुना बढ़ी नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता, रीवा से मुरैना तक बन रहा नया ऊर्जा मॉडल

प्रफुल्ल तिवारी

प्रफुल्ल तिवारी

Aug 06, 2026
10:50 AM
दिल्ली में सीएम बोले- 12 साल में 25 गुना बढ़ी नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता, रीवा से मुरैना तक बन रहा नया ऊर्जा मॉडल

भोपाल। मध्यप्रदेश स्वच्छ और हरित ऊर्जा के क्षेत्र में तेजी से देश के अग्रणी राज्यों में अपनी मजबूत पहचान बना रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि राज्य वर्ष 2030 तक देश के 500 गीगावॉट गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता के राष्ट्रीय लक्ष्य को हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। डाॅ. यादव ने यह बात गुरुवार को राजधानी दिल्ली में आयोजित 7वें अंतरराष्ट्रीय नवीकरणीय ऊर्जा सम्मेलन एवं प्रदर्शनी-2026 को संबोधित करते हुए कही।

उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार नवीकरणीय ऊर्जा, ऊर्जा भंडारण और हरित औद्योगिक विकास को प्राथमिकता देते हुए लगातार बड़े निवेश और अत्याधुनिक परियोजनाओं पर काम कर रही है। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक परिवहन और स्वच्छ ऊर्जा का उपयोग पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। दिल्ली मेट्रो बड़े पैमाने पर सौर ऊर्जा का उपयोग करती है, इसलिए यह यात्रा हरित ऊर्जा के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता का प्रतीक भी रही।

12 वर्षों में 25 गुना बढ़ी प्रदेश की क्षमता

मुख्यमंत्री ने अपने प्रस्तुतीकरण में बताया कि वर्ष 2014 के आसपास मध्यप्रदेश की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता 438 मेगावाट थी, जो अब बढ़कर 11 हजार मेगावाट तक पहुंच चुकी है। यह लगभग 25 गुना वृद्धि है। उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षों में राज्य सरकार ने नवीकरणीय ऊर्जा, पंप्ड हाइड्रो स्टोरेज और बायोमास जैसी नई नीतियां लागू कर निवेश और नवाचार के लिए अनुकूल वातावरण तैयार किया है।

उन्होंने कहा कि राज्य की निवेश-अनुकूल नीतियां, मजबूत आधारभूत ढांचा और पर्याप्त प्राकृतिक संसाधन मध्यप्रदेश को देश का उभरता हुआ ग्रीन एनर्जी हब बना रहे हैं। यही वजह है कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय निवेशकों का भरोसा लगातार प्रदेश की ओर बढ़ रहा है।

रीवा और आगर-शाजापुर-नीमच परियोजनाएं बनीं मिसाल

मुख्यमंत्री ने कहा कि 750 मेगावाट क्षमता वाली रीवा अल्ट्रा मेगा सोलर परियोजना ने देश में पहली बार सौर ऊर्जा की दर को कोयला आधारित बिजली से भी कम साबित किया। इस परियोजना को विश्व बैंक समूह का प्रतिष्ठित पुरस्कार भी मिला और इसकी केस स्टडी हार्वर्ड विश्वविद्यालय में पढ़ाई जाती है। उन्होंने बताया कि 1,500 मेगावाट की आगर-शाजापुर-नीमच सौर परियोजना में 2.14 रुपये प्रति यूनिट का रिकॉर्ड न्यूनतम सौर टैरिफ प्राप्त हुआ है। इस परियोजना से भारतीय रेलवे को आठ राज्यों में हरित ऊर्जा उपलब्ध कराई जा रही है।

ऊर्जा भंडारण और सौर योजनाओं पर विशेष जोर

मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में 278 मेगावाट क्षमता वाली देश की सबसे बड़ी फ्लोटिंग सोलर परियोजना शुरू हो चुकी है। वहीं सूर्य मित्र कृषि फीडर योजना के तहत लगभग 14,900 मेगावाट क्षमता के प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जिनमें किसानों और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों की बड़ी भागीदारी है। मुरैना में 440 मेगावाट सौर ऊर्जा और 880 मेगावाट-घंटा बैटरी स्टोरेज परियोजना प्रदेश की पहली ऐसी परियोजना है, जिसमें प्रतिस्पर्धी दरों पर बिजली खरीद समझौते किए गए हैं। इसके अलावा 4 घंटे, 6 घंटे और 24 घंटे तक ऊर्जा उपलब्ध कराने वाली स्टोरेज परियोजनाओं पर भी तेजी से काम चल रहा है।

हरित निवेश का बनेगा बड़ा केंद्र

मुख्यमंत्री ने कहा कि दावोस सहित कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर मध्यप्रदेश की हरित ऊर्जा नीतियों और औद्योगिक संभावनाओं को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया है। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले वर्षों में मध्यप्रदेश स्वच्छ ऊर्जा, ऊर्जा सुरक्षा और सतत विकास के क्षेत्र में देश का अग्रणी केंद्र बनेगा।

प्रफुल्ल तिवारी
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प्रफुल्ल तिवारी

एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।

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