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छत्तीसगढ़ : 105 साल पुराने बांध में दरार से मची खलबली, विभाग के फूले हाथ-पांव, पानी का दबाव कम करने पानी किया जा रहा शिफ्ट

प्रफुल्ल तिवारी

प्रफुल्ल तिवारी

Jul 01, 2026
07:04 AM
105 साल पुराने बांध में दरार से मची खलबली, विभाग के फूले हाथ-पांव, पानी का दबाव कम करने पानी किया जा रहा शिफ्ट

धमतरी से टीवी27 न्यूज की विशेष रिपोर्ट

छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले से एक हैरान कर देने वाली खबर सामने आई है। करीब 105 साल पुराने और अपनी अनूठी तकनीक के लिए पूरे एशिया में पहचान रखने वाले मॉडम सिल्ली बांध में दरार मिलने से प्रशासन और जल संसाधन विभाग में हड़कंप मच गया। जैसे ही बांध में दरार की जानकारी मिली, विभाग ने किसी भी संभावित खतरे से बचने के लिए तत्काल आपात कदम उठाने शुरू कर दिए। फिलहाल अधिकारियों का कहना है कि स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन एहतियात के तौर पर बांध पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।

जानकारी के मुताबिक, बांध पर पानी का दबाव कम करने के लिए मॉडम सिल्ली का पानी गंगरेल बांध में शिफ्ट किया जा रहा है। जल संसाधन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंच गए हैं और पूरी स्थिति की लगातार समीक्षा कर रहे हैं। किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए बड़ी मात्रा में गिट्टी से भरे बोरे बांध के आसपास रखे गए हैं, वहीं दो जेसीबी मशीनों को भी तैनात किया गया है ताकि जरूरत पड़ने पर तत्काल मरम्मत का कार्य किया जा सके।

पानी का दबाव कम करने पर जोर

अधिकारियों के अनुसार, दरार को फिलहाल गंभीर खतरे की श्रेणी में नहीं माना जा रहा है। उनका कहना है कि यह एक छोटी तकनीकी समस्या है, जिसे समय रहते ठीक कर लिया जाएगा। इसके बावजूद विभाग किसी तरह का जोखिम लेने के मूड में नहीं है और बांध की हर गतिविधि पर पैनी नजर रखी जा रही है।

हालांकि इस पूरे मामले में एक बड़ा सवाल यह भी उठ रहा है कि मानसून शुरू होने से पहले बांध का नियमित रखरखाव और मरम्मत कार्य क्यों नहीं कराया गया। यदि समय रहते मेंटेनेंस होता, तो शायद ऐसी स्थिति से बचा जा सकता था।

एशिया का अनोखा बांध, इसलिए है बेहद खास

धमतरी कलेक्टर ने बताया कि इस वर्ष बारिश सामान्य से कम होने के कारण गंगरेल बांध को भरने के लिए मॉडम सिल्ली बांध का पानी छोड़ा जा रहा है। उल्लेखनीय है कि मॉडम सिल्ली बांध का निर्माण वर्ष 1923 में अंग्रेजों ने कराया था। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें पूरे एशिया का इकलौता ऑटोमैटिक साइफन सिस्टम लगा हुआ है। इतना ही नहीं, इसके निर्माण में सीमेंट का इस्तेमाल भी नहीं किया गया था। यही ऐतिहासिक और तकनीकी विशेषताएं इस बांध को बेहद महत्वपूर्ण बनाती हैं। ऐसे में इसमें दरार मिलने की खबर ने स्थानीय लोगों के साथ-साथ प्रशासन की चिंता भी बढ़ा दी है।

प्रफुल्ल तिवारी
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प्रफुल्ल तिवारी

एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।

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