भोपाल में सजा ब्रिक्स संस्कृति का महाकुंभ : रवींद्र भवन में दिखी दुनिया की सांस्कृतिक विविधता, एक मंच पर गूंजे 6 देशों के रंग, संगीत और विरासत

भोपाल। भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता-2026 के तहत भोपाल के रवींद्र भवन में आयोजित ब्रिक्स सांस्कृतिक महोत्सव-2026 ने विश्व संस्कृति की अनूठी झलक पेश की। संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार की ओर से आयोजित इस भव्य कार्यक्रम में ब्रिक्स सदस्य और आमंत्रित देशों के कलाकारों ने अपनी पारंपरिक प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। संगीत, लोकनृत्य और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के जरिए विभिन्न देशों ने अपनी समृद्ध विरासत का प्रदर्शन किया और आपसी सहयोग व सांस्कृतिक आदान-प्रदान का संदेश दिया।
'सर्वे भवन्तु सुखिनः' की भावना पर आधारित रहा महोत्सव
महोत्सव का आयोजन भारत के प्राचीन दर्शन 'सर्वे भवन्तु सुखिनः' की भावना पर आधारित रहा, जो विश्व शांति, सद्भाव और सामूहिक कल्याण का संदेश देता है। यह आयोजन भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता-2026 की थीम 'लचीलेपन, नवाचार, सहयोग और निरंतरता के लिए निर्माण' के अनुरूप विभिन्न देशों के बीच सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ।

सांस्कृतिक परेड से हुआ शानदार आगाज
कार्यक्रम की शुरुआत प्रतिभागी देशों की भव्य सांस्कृतिक परेड से हुई। बेलारूस, ब्राजील, इंडोनेशिया, रूस, संयुक्त अरब अमीरात और मेजबान भारत के सांस्कृतिक प्रतिनिधिमंडलों ने पारंपरिक परिधानों और सांस्कृतिक झलकियों के साथ वैश्विक एकता और भाईचारे का संदेश दिया। यह रंगारंग शुरुआत पूरे आयोजन का आकर्षण बन गई।
हर देश की प्रस्तुति ने जीता दिल
बेलारूस के कलाकारों ने पारंपरिक लोकगीतों और हास्य लोकनृत्यों से दर्शकों का मनोरंजन किया। ब्राजील की ओर से प्रस्तुत 'कैपोएरा' ने मार्शल आर्ट, संगीत, नृत्य और एक्रोबैटिक्स का अनोखा संगम दिखाया। इंडोनेशिया के कलाकारों ने बालीनीज स्वागत नृत्य 'पुष्पांजलि' और प्रसिद्ध जावानीस नृत्य-नाटिका 'द लीजेंड ऑफ रोरो जोंगरांग' की शानदार प्रस्तुति दी।
रूस के कलाकारों ने बालालाइका, बायान, ऑल्टो डोमरा और कॉन्ट्राबास बालालाइका जैसे पारंपरिक वाद्ययंत्रों पर मनमोहक संगीत प्रस्तुत किया। वहीं संयुक्त अरब अमीरात के प्रसिद्ध संगीतकार सैफ अल-अली ने आधुनिक शैली के साथ पारंपरिक अमीराती और अरब संगीत की प्रस्तुति देकर दर्शकों की खूब तालियां बटोरीं।

राजस्थान की लोक संस्कृति ने बिखेरे रंग
भारत की ओर से प्रस्तुत 'मारू रंग – राजस्थान की विरासत' कार्यक्रम महोत्सव का विशेष आकर्षण रहा। घूमर, कालबेलिया, चरी और भवाई जैसे प्रसिद्ध लोकनृत्यों ने राजस्थान की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा को जीवंत कर दिया। रंग-बिरंगे परिधानों, लोक संगीत और मनमोहक प्रस्तुतियों ने विदेशी मेहमानों सहित सभी दर्शकों को प्रभावित किया।
ग्रैंड फिनाले में गूंजा वैश्विक एकता का संदेश
महोत्सव का समापन ग्रैंड फिनाले के साथ हुआ, जिसमें सभी देशों के कलाकार एक मंच पर नजर आए। इस यादगार प्रस्तुति ने सांस्कृतिक एकता, आपसी सम्मान और वैश्विक सद्भाव का संदेश दिया। कार्यक्रम ने यह भी साबित किया कि कला और संस्कृति केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि देशों के बीच विश्वास, सहयोग और मजबूत रिश्ते बनाने की सबसे प्रभावी कड़ी भी हैं।
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